बुंदेलखंड का अनोखा शिव मंदिर... सिर्फ एक खास नक्षत्र में होता था निर्माण कार्य, बनाने में लगे थे 21 साल
भगवान शिव की आराधना के महापर्व महाशिवरात्रि की धूम सभी मंदिरों में पूरे उत्साह के साथ देखने को मिल रही हैं. झांसी के राजकीय इंटर कॉलेज के पास स्थित प्राचीनतम सिद्धेश्वर मंदिर की महिमा भी अपरंपार है. भगवान शिव का यह मंदिर न सिर्फ झांसी बल्कि पूरे बुंदेलखंड में फेमस है. मान्यता है कि अगर आपके घर में क्लेश और अशांति है तो बस एक बार इस मंदिर में आकर परिक्रमा कर लीजिए और आपकी सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी. महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में विशेष पूजा होती है. रात 12 बजे भस्म आरती से शुरू हुआ कार्यक्रम दिन भर चलता रहेगा. महाशिवरात्रि के दिन ही इस मंदिर का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है.
इस मंदिर के निर्माण के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है. साल 1928 में जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानी पंडित रघुनाथ विनायक धुलेकर के स्वप्न में शिवलिंग स्थापना का दृश्य आया था. इसके कुछ समय बाद ही पितांबरा पीठ के स्वामीजी झांसी आए और शहर से कुछ दूरी पर स्थित जंगल में ध्यान लगाकर बैठ गए. लोगों ने इनके बारे में जेल से छूटे रघुनाथ धूलेकर को बताया. धुलेकर ने अपने स्वप्न के बारे में स्वामीजी को बताया तो उन्होंने उसी जंगल में एक गड्ढा खोदने का आदेश दिया. गड्ढा खोदने पर एक शिवलिंग और नंदी की मूर्ति प्राप्त हुई. उसी स्थान पर आज यह मंदिर स्थित है. यह मूर्ति पुष्य नक्षत्र में प्राप्त हुई थी. इसी को ध्यान में रखते हुए हर महीने के पुष्य नक्षत्र में ही यहां निर्माण कार्य चलता था. आखिरकार 21 वर्ष बाद इस मंदिर का निर्माण पूरा हुआ.
शिवरात्रि पर भव्य आयोजन
शिवरात्रि के अवसर पर रात 12 बजे मंदिर में भस्म आरती की जाएगी. इसके बाद श्रद्धालु कांवड़ लेकर ओरछा जायेंगे और वहां से जल भरकर लायेंगे. इसी जल से भगवान शिव का अभिषेक किया जायेगा. शाम को 3 क्विंटल दूध से अभिषेक किया जायेगा और उसके बाद शिव बारात निकाली जाएगी.
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