बंगाल के अंतिम नवाब की धरोहरों पर लापरवाही, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार
कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुर्शिदाबाद में बंगाल के अंतिम नवाब सिराजुद्दौला की स्मृतियों के संरक्षण को लेकर कोई पहल नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम ने सिराजुद्दौला की स्मृतियों के संरक्षण को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि मुर्शिदाबाद में बंगाल के नवाब की संपत्तियां भागीरथी नदी में समा रही हैं।
उन्होंने कहा कि ये ऐतिहासिक विरासत हैं। इनका संरक्षण जरूरी है। राज्य को एक सप्ताह के भीतर इस मामले में अपनी स्थिति से कोर्ट को अवगत कराना होगा। इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भी इस मामले में शामिल करने का आदेश दिया गया है।
हेरिटेज कमीशन को फटकार
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सिराजुद्दौला की स्मृतियों के संरक्षण को लेकर राज्य के हेरिटेज कमीशन ने भी कोई पहल नहीं की है। इस संदर्भ में उन्होंने महाबलीपुरम और कन्याकुमारी में विवेकानंद स्मारक शिला के संरक्षण की याद दिलाई। पुराने इतिहास को संरक्षित करने के बजाय उसे नष्ट किया जा रहा है।
सरकारी वकील सुमिता बंद्योपाध्याय ने दावा किया कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1758 में बंगाल के अंतिम नवाब सिराजुद्दौला की स्मृतियों को नष्ट कर दिया था। केवल नौ बीघा जमीन थी। वह भी भागीरथी के कटाव में बह रही है। इसके लिए थोड़े और समय की जरूरत है।
अगले सप्ताह मामले पर पुन: सुनवाई होगी। मालूम हो कि सिराजुद्दौला स्मृति सुरक्षा ट्रस्ट की प्रमुख समर्पिता दत्ता की ओर दायर याचिका में मुर्शिदाबाद में भागीरथी के पश्चिमी तट पर सिराजुद्दौला की संपत्तियों के जीर्णोद्धार, नवीनीकरण और संरक्षण की मांग की गई है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी गारंटी : खाद्य मंत्री राजपूत
अपनी मेहनत और समर्पण से बड़वानी बन रहा देश में कृषि, उद्यमिता एवं नवाचार का उदाहरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
निर्वाचन तैयारियां एवं स्वीप गतिविधियां तेज
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीस कम्पनी के पदाधिकारी
सुरंग में मलबा गिरने से बड़ा हादसा, 10 श्रमिकों की मौत पर पीएम ने जताया शोक
हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटे KCP के 46 उग्रवादी, मणिपुर में शांति की नई उम्मीद
सीएम मोहन यादव का बड़ा वादा पूरा, UCC बिल विधानसभा से पास; जानिए आपके लिए क्या बदलेगा
5.10 अरब रुपये के हर्जाने की मांग से Vedanta की बढ़ी मुश्किलें