महाराजपुर। आर्य समाज महाराजपुर द्वारा संचालित आर्य वीर दल प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन शिविर में शामिल बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। इस अवसर पर आर्य समाज के पुरोहित डॉ. रविंद्र कुमार शास्त्री ने यज्ञोपवीत की महिमा और इसके प्रति कर्तव्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।  
डॉ. शास्त्री ने बताया कि यज्ञोपवीत प्राचीन भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिसे भगवान राम, भगवान कृष्ण और अन्य महापुरुषों ने धारण किया। इसके तीन धागे माता-पिता और गुरु के प्रति कर्तव्यों का बोध कराते हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत धारण करने वाले को इनके प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए। शिविर पूर्ण अनुशासन के साथ कुशल प्रशिक्षकों की देखरेख में चल रहा है। व्यायाम प्रशिक्षक दिनेश आर्य और बालाराम आर्य बच्चों को जूडो, कराटे, सर्वांग सुंदर व्यायाम, लाठी, भाला और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके अलावा योग्य विद्वानों द्वारा बच्चों के चरित्र निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। तीसरे दिन शिक्षा महाविद्यालय के व्याख्याता सुरेश चंद्र विश्वकर्मा ने यज्ञोपवीत के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, यज्ञोपवीत धारण करने का अधिकार केवल ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी को इसे धारण करना चाहिए। यह धागा हमें माता-पिता और गुरु के प्रति कृतज्ञता की याद दिलाता है, जिनके ऋण से हम कभी मुक्त नहीं हो सकते। उनके प्रेरणादायी उद्बोधन ने बच्चों में उत्साह जगाया।