सरकार करेगी IBC की धारा 31(4) में संशोधन,CIRP के लिए CCI की मंजूरी जरूरी नहीं
केंद्र सरकार जल्द ही इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) में बदलाव करने की तैयारी में है। इसका मकसद ये साफ करना है कि कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत बोली लगाने के लिए कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की पहले से मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा। ये जानकारी सरकारी सूत्रों ने दी है। ये बदलाव सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें जनवरी में हिंदुस्तान नेशनल ग्लास (HNG) के लिए AGI ग्रीनपैक की जीतने वाली बोली को खारिज कर दिया गया था। वजह थी कि AGI ग्रीनपैक ने कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (Coc) से मंजूरी मिलने से पहले CCI की मंजूरी नहीं ली थी।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “हम CCI पर बोझ कम करना चाहते हैं। हम IBC में संशोधन करके इस मसले को हल करने की कोशिश करेंगे।”
क्या है पूरा विवाद?
IBC की धारा 31A (4) में कहा गया है कि अगर रिजॉल्यूशन प्लान में कॉम्पिटिशन एक्ट, 2002 की धारा 5 के तहत कोई कॉम्बिनेशन शामिल है, तो रिजॉल्यूशन अप्लिकेंट को Coc से मंजूरी मिलने से पहले CCI की मंजूरी लेनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में अपने फैसले में कहा था, “AGI ग्रीनपैक का रिजॉल्यूशन प्लान टिकाऊ नहीं है क्योंकि इसने IBC की धारा 31(4) के तहत जरूरी CCI की मंजूरी नहीं ली थी। इसलिए, 28 अक्टूबर 2022 को Coc द्वारा दी गई मंजूरी को बरकरार नहीं रखा जा सकता और इसे रद्द किया जाता है।” इस फैसले का असर भविष्य में IBC के जरिए होने वाले मर्जर पर पड़ेगा।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार अगर इस मामले में स्पष्टता लाती है, तो बोली लगाने वालों को राहत मिलेगी, जो Coc की मंजूरी से पहले CCI के पास जाने से चिंतित रहते हैं।
PWC इंडिया के पार्टनर और रेगुलेटरी लीडर अंशुल जैन ने कहा, “पहली बार रिजॉल्यूशन प्लान जमा करने के बाद, Coc की मंजूरी के लिए फाइनल जमा करने तक इसमें काफी बदलाव हो सकते हैं। अगर बोली लगाने वाला फाइनल प्लान जमा करने से पहले CCI के पास जाता है, तो ये निश्चित नहीं होता कि CCI जिस प्लान की समीक्षा कर रहा है, वही Coc द्वारा मंजूर किया जाएगा।”
सुप्रीम कोर्ट में दोबारा सुनवाई
8 मई को सुप्रीम कोर्ट ने CCI की उस याचिका पर विचार करने को सहमति जताई, जिसमें जनवरी के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की गई थी।
दरअसल, HNG के लिए AGI ग्रीनपैक और इंडिपेंडेंट शुगर कॉर्प (INSCO) के बीच बोली की रेस थी। HNG अक्टूबर 2021 में इन्सॉल्वेंसी में चली गई थी। INSCO ने 2022 में CCI की मंजूरी हासिल कर ली थी, लेकिन Coc ने AGI ग्रीनपैक को विनर के रूप में चुना, भले ही उसने उस समय CCI की मंजूरी नहीं ली थी। इसके बाद INSCO ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में इसकी शिकायत की।
विवाद का मुख्य मुद्दा ये था कि क्या CCI की मंजूरी Coc के रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी देने से पहले जरूरी है या बाद में भी ली जा सकती है। NCLT और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने कहा था कि भले ही CCI की मंजूरी जरूरी है, लेकिन ये अनिवार्य नहीं कि इसे Coc की मंजूरी से पहले लिया जाए। उन्होंने इसे केवल निर्देशात्मक माना था।
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