बिजनौर: अब गुलदार नहीं, टाइगर से कांप रहे किसान, खेतों में जाने से डर
उत्तर प्रदेश में बिजनौर के किसान अब तक गुलदार (लेपर्ड) की दहशत में थे, वहीं अब खेतों में टाइगर दिखने के बाद उनकी जान हलक में आ गई है. जिम कार्बेट नेशनल पार्क, अमानगढ टाइगर पार्क, राजाजी नेशनल एलीफेंट एंड टाइगर पार्क, हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से घिरे बिजनौर में कई दिन से टाइगर जोड़ों को खुले में घूमते देखा जा रहा है. इनके डर से किसान अपने खेतों की रखवाली करने भी नहीं जा पा रहे हैं. हालात को देखते हुए वन विभाग और प्रशासन भी अलर्ट हो गया है.
जिला प्रशासन और वन विभाग ने जिले के 100 गांवों को लेपर्ड-टाइगर हाईरिस्क क्षेत्र घोषित किया है.स्थानीय लोगों के मुताबिक जिले में पहले से गुलदारों का बसेरा है. इन गुलदारों के हमले में बीते तीन साल के अंदर 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं ढाई सौ से अधिक लोग घायल भी हुए हैं. अब नई दहशत टाइगर जोड़ों की वजह से सामने आई है. बीते दो तीन दिनों में टाइगर जोड़े खेतों में चहलकदमी करते नजर आ रहे हैं. इससे किसानों में भय की स्थिति बनी हुई है. ऐसे हाल में किसानों को खेती के काम से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है.
कालागढ़ वन क्षेत्र से निकले टाइगर
बताया जा रहा है कि ये टाइगर जोड़ा कार्बेट टाइगर पार्क की कालागढ वन रेंज से निकल कर बिजनौर के अफजलगढ के खेतों में आए हैं. मंगलवार की सुबह भी ये टाइगर भिक्कावाला गांव के खेतों में घूमते देखे गए. इन्हें देखकर खेतों में काम कर रहे किसान-मजदूर भाग खड़े हुए. वन्य जीव विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है और जंगल में बने पानी के श्रोत सूखने की कगार पर हैं. ऐसे में प्यास बुझाने के लिए टाइगर, भालू, हिरन, गुलदार आदि वन्यजीव पानी की तलाश में जंगल से बाहर भटक रहे हैं.
100 गांव लेपर्ड टाइगर बाहुल्य क्षेत्र घोषित
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले के खेतों में इस समय 500-600 तेंदुए खेतों में घूम रहे हैं. वहीं अब टाइगर भी दिखाई देने लगे हैं. हालात को देखते हुए बिजनौर की डीएम जसजीत कौर ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग की. उन्होंने अधिकारियों को हिंसक वन्य जीवों से निपटने के उपाय करने और इसके लिए डीपीआर तैयार करने को कहा है. इसके लिए उन्होंने जन जागरुकता अभियान भी शुरू करने को कहा है. डीएम के मुताबिक बिजनौर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां नदी, नहरें, रिजर्व और सोशल फॉरेस्ट बहुतायत में होने के कारण वन्य जीवों को भरपूर पोषण और संरक्षण मिलता है. जिससे उनकी आबादी भी लगातार बढ रही है. फिलहाल सौ गावों को चिन्हित कर लेपर्ड और टाइगर बाहुल्य क्षेत्र घोषित किया गया है.
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