प्रदेश MBBS बंधपत्र नीति: एक साल सरकारी सेवा या ₹10 लाख का जुर्माना
भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकारी खर्चें पर मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए मेधावी छात्र-छात्राओं पर सरकार ने एक महत्वपूर्ण शर्त लगा दी है. सभी मेधावी छात्र-छात्राओं को सरकार की यह शर्त पूरी करनी होगी. ऐसा न करने पर छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में लगने वाली पूरी फीस सरकार को लौटानी होगी. राज्य सरकार ने तय किया है कि अब मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना (MMVY) के तहत सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं की पूरी फीस सरकार भरेगी, लेकिन बदले में ऐसे सभी स्टूडेंट्स को एमबीबीएस के बाद 5 सालों तक ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में नौकरी करनी होगी.
यदि शर्त न मानी तो लौटना होगा पैसा
राज्य सरकार ने इस शर्त को शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू कर दिया है. दरअसल, मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में राज्य सरकार मेडिकल जैसे प्रोफेशनल कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स की पूरी फीस सरकार भरती है. अब मेडिकल की पढ़ाई करने पर स्टूडेंट्स किसी प्राइवेट या सरकारी कॉलेज से पढ़ाई करता है तो भी उसे 5 साल ग्रामीण क्षेत्र के अस्पताल में अपनी सेवाएं देनी होंगी. ऐसा न करने पर स्टूडेंट्स को पढ़ाई पर खर्च हुई पूरी फीस की राशि राज्य सरकार को देना होगा.
कराएगी सरकार
इसके लिए अब राज्य सरकार प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों से भी बॉड साइन कराएगी. यदि कोई स्टूडेंट्स पढ़ाई के बाद 5 साल के स्थान पर ढाई साल ही ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देगा तो उसे आधी फीस वापस करनी होगी. हालांकि, राज्य सरकार ने यह भी तय किया है कि मेधावी विद्यार्थी योजना में उन्हीं स्टूडेंट्स को इस योजना का लाभ दिया जाएगा, जिनकी नीट यूजी में रैंक 1.5 लाख से ऊपर है. यानी यदि इससे नीचे की रैंक है तो योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा.
गांवों में डॉक्टर्स नहीं जाना चाहते हैं
उधर, सरकारी मेडिकल कॉलेज से पढ़कर निकलने वाले डॉक्टर्स को बांड के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ किया जाता है, लेकिन डॉक्टर्स ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देना ही नहीं चाहते. राज्य सरकार ने एमबीबीएस करने वाले 1977 और पीजी करने वाले 876 डॉक्टर्स को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के सरकारी हॉस्पिटल में भेजने के आदेश जारी किए थे.
इन्हें 15 दिन में हॉस्पिटल में ज्वाइन करने के आदेश दिए गए, लेकिन 280 डॉक्टर्स ही ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने पहुंचे. बाकी डॉक्टर्स ने ज्वाइनिंग ही नहीं दी. अब बॉंड का उल्लंघन करने वाले डॉक्टर्स पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के मुताबिक इनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
प्रदेश में विशेषज्ञों के आधे से ज्यादा पद खाली
दरअसल, मध्य प्रदेश के सरकारी हॉस्पिटल्स में डॉक्टर्स की भारी कमी है. प्रदेश में 5449 स्वीकृत पदों में से 3948 पद खाली हैं और सिर्फ 1495 स्पेशलिस्ट ही काम कर रहे हैं. हालांकि प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के मुताबिक डॉक्टर्स की कमी को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. इसके लिए भर्ती की जा रही है.
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