सुप्रीम कोर्ट की फटकार: दर्शन को जमानत देने में हाईकोर्ट ने की अपनी शक्तियों की अनदेखी
मुंबई : सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को रेणुकास्वामी मर्डर केस में कन्नड़ एक्टर दर्शन थुगुदीपा और छह अन्य को जमानत देने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले पर नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह विवेकाधीन शक्ति का गलत इस्तेमाल है। रेणुकास्वामी हत्याकांड मामले में अभिनेता दर्शन की जमानत रद्द करने की कर्नाटक सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनीं दलीलें
न्यूज एजेंसी पीटीआई कए मुताबिक न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने अभिनेता और अन्य आरोपियों को जमानत देने के उच्च न्यायालय के 13 दिसंबर, 2024 के आदेश के खिलाफ कर्नाटक सरकार की अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और मामले में आरोपियों का प्रतिनिधित्व कर रहे सिद्धार्थ दवे और अन्य की दलीलें सुनीं।
सुप्रीम कोर्ट ने किया यह सवाल
अदालत ने राज्य और कुछ अन्य लोगों द्वारा दायर लिखित नोट को रिकॉर्ड में ले लिया और अन्य आरोपियों के वकील से एक सप्ताह के भीतर संक्षिप्त नोट दाखिल करने को कहा। राहत दिए जाने पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति पारदीवाला ने बचाव पक्ष के वकील से पूछा, 'क्या आपको नहीं लगता कि उच्च न्यायालय ने जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए सात आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है'? न्यायाधीश ने आगे कहा, 'चिंता की बात यह है कि जिस तरह से उच्च न्यायालय ने जमानत आदेश दिया, क्या उच्च न्यायालय हर जमानत मामले में एक ही तरह का आदेश देता है'?
गवाहों को बताया अविश्वसनीय
पीठ ने दो चश्मदीद गवाहों, किरण और पुनीत के बयानों से उच्च न्यायालय के निपटने के तरीके पर भी सवाल उठाया और उन्हें 'अविश्वसनीय गवाह' बताया। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा, 'यह अभियुक्तों को जमानत देने में विवेकाधीन शक्तियों का गलत इस्तेमाल करना है। यह बताते हुए कि सभी अभियुक्त जमानत पर बाहर हैं और मुकदमा अभी शुरू होना बाकी है, अदालत ने पूछा, 'क्या उच्च न्यायालय ने न्यायिक रूप से अपने विवेक का प्रयोग किया है'?
जून, 2024 में हुई थी दर्शन की गिरफ्तारी
बता दें कि 17 जुलाई को पीठ ने उच्च न्यायालय द्वारा आरोपी को जमानत दिए जाने पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि जिस तरह से विवेकाधीन शक्ति का प्रयोग किया गया, उससे वह आश्वस्त नहीं है। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो हम उच्च न्यायालय द्वारा विवेकाधिकार के प्रयोग के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं'। शीर्ष अदालत ने 24 जनवरी को राज्य सरकार की याचिका पर पवित्रा गौड़ा और अन्य को मामले में नोटिस जारी किए थे। बता दें कि दर्शन को 11 जून, 2024 को अपने एक फैन रेणुकास्वामी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसकी हत्या उसी वर्ष 8 जून को हुई थी, जब उसने कथित तौर पर गौड़ा को अश्लील संदेश भेजे थे।
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