गलवान संघर्ष के बाद पहली बार चीन जाएंगे मोदी, SCO समिट में होंगे शामिल
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर चीन दौरे पर जाने वाले हैं। यह यात्रा 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच होगी, जहां वे शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट में हिस्सा लेंगे। खास बात यह है कि यह दौरा जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भारत-चीन सैन्य झड़प के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी।
प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए मोदी की यह छठवीं चीन यात्रा होगी। पिछले 70 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने इतनी बार चीन का दौरा नहीं किया है।
अब तक पीएम मोदी कब-कब गए चीन:
14–16 मई 2015 – आधिकारिक दौरा (बीजिंग, शंघाई, शियान) ,4–5 सितंबर 2016 – G20 समिट, हांगझोउ ,3–5 सितंबर 2017 – ब्रिक्स समिट, श्यामन, 27–28 अप्रैल 2018 – अनौपचारिक शिखर वार्ता, वुहान, 9–10 जून 2018 – SCO समिट, किंगदाओ , 31 अगस्त–1 सितंबर 2025 (आगामी) – SCO समिट, चीन
इन प्रधानमंत्रियों ने एक भी बार नहीं किया चीन का दौरा:
गुलजारी लाल नंदा ,लाल बहादुर शास्त्री , इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई ,चौधरी चरण सिंह , विश्वनाथ प्रताप सिंह चंद्रशेखर, एच.डी. देवगौड़ा, इंदर कुमार गुजराल
किस पीएम ने कितनी बार किया चीन दौरा:
पंडित नेहरू – 1 बार ,राजीव गांधी – 1 बार, नरसिम्हा राव – 1 बार,अटल बिहारी वाजपेयी – 1 बार,डॉ. मनमोहन सिंह – 2 बार नरेंद्र मोदी – अब तक 5 बार, छठवां दौरा शीघ्र
विशेष बात:
पीएम मोदी सबसे ज्यादा बार चीन जाने वाले भारतीय प्रधानमंत्री बन चुके हैं, इसके बावजूद चीन ने 2020 में गलवान घाटी में घुसपैठ कर दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा कर दी थी। ऐसे में मोदी का यह नया दौरा रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
'मेरी बात PM तक पहुंची', शरद पवार ने बताई धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी
नौकरी का झांसा देकर बनाया बंधक, युवकों की आपबीती ने उड़ा दिए सभी के होश
सरकार के दावे बनाम हकीकत! 12 साल में किन-किन नेताओं ने दिया इस्तीफा?
दमिश्क हाईवे बना हादसे का शिकार, भीषण बस दुर्घटना में 35 की मौत
रालोद को बड़ा झटका, 10 पदाधिकारियों ने एक साथ छोड़ी पार्टी की जिम्मेदारी
सेबाश्रय शिविर घोटाले पर सियासत तेज, CM शुभेंदु ने 'धोखेबाज भतीजे' को ललकारा
CJP Protest पर BSP प्रमुख मायावती की दोटूक, कार्यकर्ताओं को दी सख्त हिदायत
FY26 रिजल्ट: PhonePe की रेवेन्यू बढ़ी, लेकिन मुनाफे की राह अब भी मुश्किल