हर घर तिरंगा अभियान: गनियारी की दीदियां जुटीं तिरंगा निर्माण में मिला डेढ़ लाख झंडों का ऑर्डर
रायपुर : आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत पूरे देश में हर घर तिरंगा अभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बिलासपुर जिले के गनियारी स्थित नारी शक्ति गारमेंट फैक्ट्री देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है, जहां बिहान योजना से जुड़ी 30 स्व-सहायता समूहों की 100 से अधिक महिलाएं तिरंगा निर्माण में पूरी लगन से जुटी हुई हैं।
इन दीदियों को 1.50 लाख से अधिक तिरंगे तैयार करने का ऑर्डर मिला है, जो जिले के शासकीय व अशासकीय संस्थानों सहित आम नागरिकों को उपलब्ध कराए जाएंगे। बढ़ती मांग को देखते हुए महिलाएं इस जिम्मेदारी को उत्साहपूर्वक निभा रही हैं।न केवल यह कार्य उनके लिए अतिरिक्त आय का जरिया बना है, बल्कि राष्ट्र सेवा से जुड़ने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। दीदियां तिरंगे के निर्माण को आर्थिक उपार्जन से बढ़कर देशभक्ति और आत्मसम्मान से जोड़कर देख रही हैं। नारी शक्ति गारमेंट फैक्ट्री की अध्यक्ष श्रीमती मीना मानिकपुरी ने बताया कि विभिन्न विभागों व संस्थानों से तिरंगे बनाने के लिए लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए दीदियां निरंतर कार्य कर रही हैं।
समूह की सदस्य राजेश्वरी यादव और नंदिनी साहू ने बताया कि तिरंगा निर्माण में लगभग 100 महिलाएं जुटी हैं और उन्हें प्रतिदिन औसतन 500 रुपए तक की अतिरिक्त आय हो रही है। वे इस बात से गर्वित हैं कि वे एक ऐसे कार्य से जुड़ी हैं, जिससे सीधे-सीधे देश की सेवा में सहभागी बन रही हैं, गारमेंट फैक्ट्री में तिरंगे निर्माण की पूरी प्रक्रिया धागा कातने से लेकर सिलाई, प्रेसिंग और पैकिंग तक की जिम्मेदारी महिलाएं स्वयं निभा रही हैं। इससे उन्हें न केवल आर्थिक सशक्तिकरण मिला है, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा मिली है।
जिला पंचायत सीईओ बिलासपुर ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी जिले में तिरंगा निर्माण की जिम्मेदारी दीदियों को दी गई है। ये तिरंगे कम कीमत पर आमजन के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिला पंचायत परिसर में लगाए गए समूह के स्टॉल के माध्यम से तिरंगे की बिक्री की जा रही है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि वे हर घर तिरंगा अभियान में सहभागी बनें और अपने घरों पर तिरंगा फहराकर देशप्रेम की भावना को प्रकट करें, यह अभियान जहां एक ओर हर घर तक राष्ट्रप्रेम का संदेश पहुंचा रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अंचल की महिलाओं को सम्मान, सशक्तिकरण और आजीविका का बेहतर माध्यम भी उपलब्ध करा रहा है।
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