तीन दिवसीय विशेष जांच एवं जन-जागरूकता अभियान 'बने खाबो - बने रहिबो'
रायपुर : छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा खाद्य सुरक्षा के समस्त हितधारको जैसे खाद्य पदार्थ के उत्पादकों, खाद्य पदार्थ के विनिर्माताओं, वितरकों, थोक एवं चिल्हर विक्रेताओं, खाद्य परोसने वाले संस्थानों, उपभोक्ताओं एवं जन सामान्य को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से तीन दिवसीय विशेष जांच एवं जन-जागरूकता अभियान “बने खाबो - बने रहिबो“ का शुभारंभ अपने निवास स्थान से 4 अगस्त को चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर किया गया।
“बने खाबो - बने रहिबो“ अभियान में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के समस्त 33 जिलों के खाद्य सुरक्षा अधिकारयों द्वारा खाद्य परोसने वाले संस्थानों / स्ट्रीट फूड वेंडर्स / रेस्टोरेंट आदि की सघन जांच की गयी। इसके साथ की प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 08 चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला वाहन द्वारा भी रोस्टर अनुसार समस्त जिलों का दौरा कर स्थानीय हाट बाजार / स्ट्रीट फूड / रेस्टोरेंट में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता की जांच की गयी।
इस दौरान खाद्य कारोबारकर्ताओं , उपभोक्ताओं एवं जन सामान्य को खाद्य सुरक्षा के प्रति एफ.एस.एस.ए.आई. के नियमों एवं खाद्य सुरक्षा के साधारण सिद्वांत से अवगत कराया गया। खाद्य सुरक्षा के साधारण सिद्वांत जैसे कि भोजन को एक विशेष तापमान पर रख रखाव, खाद्य पदार्थों के पैकेजिंग एवं परोसने में अखबारी कागज का उपयोग ना करना, खाना पकाने में एक ही तेल को बार-बार गर्म कर उपयोग ना करना, फोर्टिफाईड निशान युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना आदि ऐसी कई छोटी-छोटी बातें है जिसे अपनाकर लोग बहुत से गंभीर बीमारियों से बच सकते है एवं स्वस्थ जीवन जी सकते है। जन सामान्य को सही भोजन ही स्वस्थ जीवन का आधार है की संकल्पना के बारे में बताया गया।
दीपक कुमार अग्रवाल नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन छत्तीसगढ़ द्वारा जानकारी दी गयी थी कि, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर इस तरह की प्रदेश व्यापी अभियान चलाकर लोगों को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जायेगा एवं आवश्यक होने पर कार्यवाही भी की जायेगी।
“बने खाबो - बने रहिबो“ अभियान के तहत 03 दिनों में ही 162 विधिक नमूने, 628 सर्विलेंस नमूने लिये गये। चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला वाहन द्वारा पूरे प्रदेश में भ्रमण कर 1978 खाद्य नमूने की ऑनस्पॉट टेस्टिंग की गयी एवं अधिकाधिक जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। इस तरह “बने खाबो - बने रहिबो“ अभियान अपने उद्देश्यों में सफल रहा।
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