विवादित कच्चाथीवू द्वीप पहुंचे राष्ट्रपति दिसानायके....तमिलनाडू में तनाव चरम पर
कोलंबो । कच्चाथीवू द्वीप को लेकर भारत और श्रीलंका के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अचानक विवादित द्वीप का दौरा कर कच्चाथीवू को श्रीलंका का अभिन्न अंग बताया है। उनकी इस यात्रा से भारत और श्रीलंका के संबंधों में नया तनाव पैदा हुआ है। राष्ट्रपति दिसानायके ने कच्चाथीवू को श्रीलंका का अभिन्न अंग बताकर कहा कि उनकी सरकार किसी भी बाहरी दबाव में अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कच्चाथीवू की रक्षा करना श्रीलंका का दायित्व है।
वहीं अभिनेता से राजनेता बने विजय ने भारत सरकार पर तीखा हमला कर आरोप लगाया है कि केंद्र तमिल मछुआरों की रक्षा करने में नाकाम रहा है। विजय ने इस मुद्दे पर तमिलनाडु में एक आंदोलन का नेतृत्व भी किया था। उनका कहना है कि अब तक 800 से अधिक भारतीय मछुआरों को श्रीलंकाई नौसेना ने हिरासत में लिया है और कई मछुआरों की मौत भी हो चुकी है।
कच्चाथीवू विवाद का इतिहास
कच्चाथीवू द्वीप ऐतिहासिक रूप से रामनाथपुरम राजाओं का हिस्सा था और ब्रिटिश शासनकाल में मद्रास प्रेसिडेंसी के अधीन था। 1974 में हुए एक समझौते के तहत इस द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया गया था। इस समझौते में भारतीय मछुआरों और तीर्थयात्रियों को बिना वीज़ा के आवाजाही और मछली पकड़ने की छूट दी गई थी। 1976 में समुद्री सीमा के पुनर्निर्धारण के बाद भारतीय मछुआरों को श्रीलंकाई जलक्षेत्र में मछली पकड़ने से रोक दिया गया। तब से यह द्वीप भारत और श्रीलंका के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। अब देखना यह है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति की इस यात्रा के बाद भारत सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है।
भारत की अगली चाल पर नजर
श्रीलंकाई राष्ट्रपति की यह यात्रा तब हुई है, जब तमिलनाडु में कच्चाथीवू को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि भारत सरकार श्रीलंका के इस कदम पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती है।
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