सजा पूरी होने के बावजूद जेल में बंद सोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने दिया न्याय, 25 लाख रुपए मुआवजा तय
भोपाल: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को एक आदमी को 25 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। उस व्यक्ति को सजा पूरी होने के बाद भी चार साल और सात महीने तक जेल में रहना पड़ा था। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने एमपी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करने के लिए राज्य की सभी जेलों में एक सर्वे करने का भी आदेश दिया है। कोई भी कैदी अपनी सजा पूरी करने या जमानत मिलने के बाद भी जेल में नहीं रहे।
चौंकाने वाला है मामला
दरअसल, बेंच ने पहले सोहन सिंह नाम के रेप के दोषी को लंबे समय तक जेल में रखने को काफी चौंकाने वाला बताया था। इसके साथ ही बेंच ने राज्य की व्यवस्था की नाकामी के लिए कड़ी आलोचना की है। बेंच ने कहा कि इस तरह किसी को ज्यादा समय तक जेल में रखना मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। इसे माफ नहीं किया जा सकता है।
इस साल की शुरुआत में कोर्ट के सामने आया
यह मामला इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। सोहन सिंह ने 2017 में एमपी हाईकोर्ट के एक आदेश के बावजूद अपनी लंबी कैद के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने उसकी उम्र कैद की सजा को घटाकर सात साल कर दिया था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सिंह ने अपनी कानूनी अवधि से लगभग आठ साल अधिक जेल में बिताए हैं। कोर्ट राज्य सरकार से इसे लेकर जवाब मांगा था।
4.7 साल अधिक जेल में बिताए
सोमवार को राज्य सरकार के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता नचिकेता जोशी ने बताया कि सिंह कुछ समय के लिए जमानत पर थे। इसलिए, अतिरिक्त कारावास लगभग 4.7 साल का था।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
वहीं, सोहन सिंह के वकील महफूज अहसन नाजकी ने आंकड़ों की पुष्टि की और जवाबदेगी की मांग की है। कोर्ट ने इस मामले में सरकार की तरफ दायर भ्रामक हलफनामों पर नाराजगी जताई है। इन हलफनामों में अतिरिक्त कारावास की अवधि को बढ़ाकर बताया गया था।
रेप के मामले में ठहराया था दोषी
गौरतलब है कि सोहन सिंह की परेशानी दो दशक पहले शुरू हुई थी। खुरई, जिला सागर की एक सत्र अदालत ने जुलाई 2005 में उसे बलात्कार, घर में जबरन घुसने और आपराधिक धमकी के आरोप में दोषी ठहराया था। उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1), 450 और 506-बी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, अपील पर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2017 में अभियोजन पक्ष के मामले में कमियां पाईं। इसमें FIR दर्ज करने में देरी और सहायक चिकित्सा साक्ष्य की कमी शामिल थी। कोर्ट ने सजा को घटाकर सात साल की कठोर कारावास कर दिया, जबकि दोषसिद्धि को बरकरार रखा। सजा में स्पष्ट बदलाव के बावजूद, सिंह 6 जून, 2025 तक जेल में रहे। यह हाई कोर्ट के आदेश के लगभग आठ साल बाद और अधिकतम सजा से बहुत अधिक था जो वह कानूनी रूप से काट सकते थे। सुप्रीम कोर्ट में मामला आने के बाद ही यह बात सामने आई।
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