गाड़ी के लिए वीआईपी नंबर की चाहत रखने वालों को सरकार की नई पॉलिसी का झटका, अब ऐसे मिलेगा नंबर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गाड़ियों के लिए वीआईपी नंबर हासिल करने की चाहत अब मुसीबत बन गई है। राज्य के परिवहन विभाग ने वीआईपी नंबरों की नीलामी शुरू की थी, लेकिन कई वाहन मालिकों को न केवल उनका मनचाहा नंबर नहीं मिला, बल्कि जमा की गई राशि का रिफंड भी अटक गया है। अनुमान है कि यूपी के करीब 3200 आवेदकों की नौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि फंसी हुई है। अकेले लखनऊ में ही करीब 400 से ज्यादा ऐसे लोग हैं।
परिवहन विभाग ने 450 से अधिक नंबरों को वीआईपी नंबरों की कैटिगरी में रखता है। इसके लिए इच्छुक वाहन मालिक को बोली लगानी पड़ती जैसे 0001 से 0009 के लिए बेस रेट तय किया था, जिसमें 0001 का मूल्य एक लाख रुपये रखा गया। आवेदकों को नीलामी में हिस्सा लेने के लिए बेस रेट का एक तिहाई, यानी करीब 33,000 रुपये जमा करने होते थे। नंबर मिलने पर पूरी राशि चुकानी होती थी, जबकि असफल बोलीदाताओं को उनका पैसा वापस मिलना था। यह पूरी प्रकिया लगभग दो सप्ताह में पूरी हो जाती है। लेकिन फिलहाल 3200 से अधिक लोगों का रिफंड फंसा हुआ है। इसकी वजह यह है कि यह रिफंड वाहन मालिक के खाते में न होकर उस साइबर कैफे के खाते में जाएगा जहां से यह आवेदन किया गया था।
वाहन मालिकों का बढ़ता दबाव
वाहन मालिकों में नाराजगी बढ़ रही है। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने नीलामी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन नंबर नहीं मिलने के बावजूद उनका पैसा वापस नहीं हुआ। बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास साइबर कैफे वाले को पैसा देने का कोई सबूत नहीं है क्योंकि उन्होंने कैश पेमेंट किया था।
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