छतरपुर। श्री कृष्णा विश्वविद्यालय में मिसाइल मैन, देश के पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम जी की जयंती पर  नए विचारों को आकार देने, शिक्षा में नवाचार लाने  जैसे विषयों के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन में विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। सभी प्रतिभागियों ने डॉ. कलाम के उच्च विचार एवं जीवन मूल्य जो सदैव प्रेरणादायी रहेंगे पर पोस्टर बनाकर अपनी कला कौशलता का परिचय दिया। पोस्टर प्रतियोगिता के पश्चात विश्वविद्यालय के सभागार में डॉ.कलाम का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत विषय पर व्यख्यानमाला का आयोजन किया गया। व्याख्यानमाला के आयोजन का प्रारम्भ मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ.बृजेन्द्र सिंह गौतम, कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलगुरु डॉ.अमित कुमार जैन एवं कुलसचिव डॉ. दिगन्त द्विवेदी ने माँ सरस्वती एवं डॉ. कलाम की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. संजीव कुमार अवस्थी ने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुये आज के कार्यक्रम की रूपरेखा की विस्तृत चर्चा करते हुये बताया कि आज का कार्यक्रम छात्रों में नवाचार, शोध और सामाजिक विकास से जुड़े रचनात्मकता से संबंधित है।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महोदय डॉ. बृजेन्द्र सिंह गौतम ने अपने उद्बोधन में बताया कि  भारत के मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध डॉ. अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम ने वैमानिकी इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता हासिल की और भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे इसरो के प्रक्षेपण यान कार्यक्रम, विशेष रूप से पीएसएलवी विन्यास के विकास के लिए कार्य किया। इसरो में दो दशकों तक काम करने के बाद, डॉ. कलाम ने स्वदेशी निर्देशित मिसाइलों के विकास की ज़िम्मेदारी संभाली और अग्नि तथा पृथ्वी मिसाइलों के विकास और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री कलाम को सामरिक मिसाइल प्रणालियों के शस्त्रीकरण और पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षणों का श्रेय भी दिया जाता है, जिसने भारत को एक परमाणु संपन्न राष्ट्र बनाया। वे भारत के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में से एक थे, जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने का अनूठा सम्मान प्राप्त हुआ है। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। 2002 में, वे भारत के 11वें राष्ट्रपति बने।
प्रभारी कुलगुरु  डॉ. अमित कुमार जैन  ने अपने उद्बोधन के दौरान बताया कि भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। हर सफल स्टार्टअप किसी न किसी नवाचार का परिणाम होता है, जो न केवल रोजगार सृजित करता है बल्कि समाज की किसी आवश्यकता को पूरा करता है। भारत में युवाओं के पास असीम ऊर्जा और कल्पनाशक्ति है। यदि यही ऊर्जा नवाचार में लगाई जाए तो हम न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि विश्व का नेतृत्व भी कर सकते हैं। यदि हर छात्र, युवा और नागरिक अपने क्षेत्र में नवाचार करे, उद्यमिता की भावना रखे, और नये विचारों को आगे बढ़ाए  तो भारत न केवल आत्मनिर्भर होगा बल्कि विश्वगुरु  भी बनेगा । इस तरह के नवाचार कर हम आत्मनिर्भर बनकर  हमारे प्रेरणास्रोत भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ऐ. पी. जे अब्दुल कलाम जी का सपना पूरा कर सकेंगे।
संस्थान की नवाचार परिषद के संयोजक उपकुलगुरु डॉ.गिरीश त्रिपाठी ने बताया कि डॉ. कलाम ने भारत को मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवाओं को विज्ञान और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित किया। उनके विचार और व्यक्तित्व आज भी देश के युवाओं के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।
कुलसचिव डॉ. दिगंत द्विवेदी ने  कहा कि डॉ. कलाम का जीवन सादगी, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने सीमित संसाधनों में भी जो उपलब्धियां हासिल कीं, वे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम ने भारत को मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवाओं को विज्ञान और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित किया। उनके विचार और व्यक्तित्व आज भी देश के युवाओं के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं। कलाम ऐसे नायक भारत को विश्वपटल पर पहचान दी।
आज के पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान सिमी जैन बीबीए, आरती पटेल एमएससी एग्रीकल्चर, गुड्डी अहिरवार बीएससी ने प्राप्त किया । कार्यक्रम का संचालन प्रबंधन विभाग की सहायक प्राध्यापक सुमेधा राय ने एवं आभार विज्ञान संकाय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सादाब सिद्दीकी ने किया। इस कार्यक्रम में समस्त विभागों के प्राध्यापकगण और विद्यार्थी उपस्थित रहे।