जीवन की बैलेंस शीट को बैलेंस करने की जरूरत: श्रीमती आशा असाटी
बड़ा मलहरा। जनपद सभा कक्ष में आयोजित अल्पविराम परिचय कार्यशाला में जीवन का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए मास्टर ट्रेनर श्रीमती आशा असाटी ने कहा कि आनंदित बने रहने के लिए मदद कृतज्ञता और क्षमा के भाव के साथ जीना होगा, अकेले फाइनेंशियल नहीं लाइफ बैलेंस शीट पर भी ध्यान देना होगा। इस मौके पर आनंद विभाग के जिला संपर्क व्यक्ति लखनलाल असाटी, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक आशीष ताम्रकार, ब्लॉक समन्वयक अनुपमा नायक, मास्टर ट्रेनर शिल्पा राय सहित शिक्षा, महिला बाल विकास, जल संसाधन,पुलिस एवं वन विभाग के कर्मचारी उपस्थित थे। आनंद विभाग के सीईओ आशीष कुमार के आग्रह पर कलेक्टर पार्थ जैसवाल द्वारा जिले के सभी आठ विकासखंडों में शासकीय अधिकारियों कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय अल्पविराम परिचय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। श्रीमती आशा असाटी ने कहा कि हमें जीवन में जितनी मदद मिली है, हम दूसरों की उतनी मदद करके इसे बैलेंस कर सकते हैं। यदि हमें किसी से कोई दुख पहुंचा है तो उसको क्षमा करके और यदि हमने किसी को दुखी किया है तो उससे क्षमा मांग कर हम अपने दिल के बोझ को कम कर सकते हैं। लखन लाल असाटी ने कहा कि जब हम अपने अंदर चल रहे विचारों का परीक्षण करते हैं तब हमें उसके पीछे अपने भाव और संस्कार दिखाई देते हैं, यदि हमारे संस्कार ठीक हैं, भाव ठीक हैं तो विचार भी ठीक चलते हैं जिससे बाहर व्यवहार भी ठीक हो जाता है। इसीलिए विचार करते समय भाव पर फोकस करना है,
मददगारों को याद कर आंखें छलछलाई
मदद के दोनों प्रश्नों पर जीवन का लेखा-जोखा बना उसकी शेयरिंग करते समय प्रतिभागियों की आंखों में आनंद के आंसू थे, डिप्टी रेंजर राजेंद्र कुमार सक्सेना ने कहा कि इस समय वह अपनी बुआ फूफा को याद कर आत्ममुग्ध हैं जिन्होंने उनकी पढ़ाई लिखाई की पूरी व्यवस्था की, वह उन्हें आज भी अपने मां-बाप से अधिक प्यार करते हैं, कोरोना काल में अपने बेटे के इलाज में मदद करने वाले एसडीओ फॉरेस्ट वाईएस परमार को भी उन्होंने इस मौके पर याद किया, शिक्षक लोकेश अवस्थी ने कहा कि उन्हें अपना कैरियर बनाने में उनकी भाभी श्रीमती कुसुमलता अवस्थी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ जिसके लिए वह उनके प्रति जीवन भर कृतज्ञ हैं। आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक सुगंधी जैन ने कहा कि जब उनके परिवार का बंटवारा हुआ तो उनके जेठ दयाचंद जैन ने कहा कि हम अपनी बहू को घर से बाहर नहीं करेंगे और वह खुद बाहर किराए का मकान लेकर रहने लगे, आज भी वह उनको याद करके भाव भिवोर हो जाती हैं। पर्यवेक्षक आरती जैन ने कहा कि नौकरी में उनके पति ने और परिवार में उनकी छोटी सी बेटी ने अपने से छोटे भाई को पालने में यादगार मदद की है। वनरक्षक जितेंद्र गुप्ता ने कहा कि उनकी दादी के पैरालाइज होने पर दादी के भाई के बेटे ने जो मदद की वह अविस्मरणीय है।
25 साल की नौकरी में 1 मिनट भी नहीं छोड़ा स्कूल
शिक्षक राकेश कुमार तिवारी ने कहा कि अपनी अब तक की नौकरी में ऐसा कोई दिन नहीं आया है जब वह समय से पहले स्कूल न पहुंचे हों और समय के बाद स्कूल ना छोड़ा हो। वह रोज ही स्कूल में निर्धारित समय से कम से कम 2 घंटे अधिक उपस्थित रहते हैं। उन्होंने कहा कि वह हर साल कई गरीब छात्र-छात्राओं की बोर्ड फीस जमा करते हैं और लोकेश कुमार अवस्थी के साथ मिलकर निर्धन विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग गणित और बायोलॉजी पढाते हैं।
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