महान वही जिसने समय की सहभागिता समझी
बागेश्वर महाराज ने साधकों से कहा, व्यस्त रहो लेकिन मस्त रहना भी जरूरी
छतरपुर। तीन दिवसीय ऊर्जा संचय समागम के दूसरे दिन बागेश्वर महाराज ने सभी साधकों से कहा कि जिसने समय की सहभागिता समझी वही जीवन में महान बना है। भाग दौड़ वाली जिंदगी के साथ कुछ मस्ती भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि समय का संतुलन बनाकर चलना चाहिए।
ऊर्जा संचय समागम के दूसरे दिन बागेश्वर महाराज ने कहा कि 24 घंटे के समय को तीन भागों में बनता जा सकता है। 8 घंटे परिवार की आजीविका के लिए, 8 घंटे समाज सेवा के लिए और 8 घंटे स्वयं के लिए खर्च करने से यह जीवन आनंदमय हो जाता है। आजीविका के बाद शेष 16 घंटों में से 8 घंटे दूसरों की भलाई, सेवा सदाचार, साधु संत सेवा, देश सेवा और गौ सेवा में लगाना चाहिए। शेष 8 घंटे मनोरंजन, खेलकूद, परिवार के साथ समय बिताना, मित्रों से मिलने, नींद लेने में खर्च करना चाहिए। देश विदेश से आए साधकों से महाराज श्री ने कहा कि भारत में शरीर विषहरण तो सुना होगा लेकिन हम यहां मस्तिष्क विषहरण करा रहे हैं। यह प्रक्रिया विश्व भर में न केवल कारगर सिद्ध होगी बल्कि लोग इसका अनुशरण करेंगे। महाराज श्री ने कहा कि लय से विलय की यात्रा ही परमात्मा को समझने, जानने और प्राप्त करने का मार्ग है। जीवन को लयबद्ध करिए ताकि इससे संगीत स्वर निकले शोर नहीं।
रात्रि में भजनों की प्रस्तुति ने बढ़ाया साधकों में उत्साह
कहते हैं स्वर में ईश्वर होता है। जब लयबद्ध स्वर में कोई भजन गाया जाता है तो मन अनायास झूम कर भजन में खो जाता है। रात्रि में लवकुश नगर शिष्य मंडल के प्रसिद्ध कीर्तनकार दादा मातादीन विश्वकर्मा और उनके साथियों की भजनों की जो प्रस्तुति हुई वह भावविभोर करने वाली रही। एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुतियां देर रात तक चलती रहीं। साधकों के अलावा अन्य लोगों ने भी भजनों की प्रस्तुतियों का आनंद उठाया।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव! प्रल्हाद जोशी ने संभाला कार्यभार
'न कर्फ्यू-न दंगा, सब चंगा', योगी के बयान से मैनपुरी की सियासत गरमाई
कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा खुलासा! बोले- आंदोलन के पहले दिन इस्तीफा देना चाहते थे धर्मेंद्र प्रधान
अनियंत्रित कार बनी मौत का जाल, तालाब में डूबने से एक ही परिवार के 5 लोगों की जान गई