छतरपुर। जिला न्यायालय में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर अधिवक्ताओं में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। जिला अधिवक्ता संघ छतरपुर के सदस्यों ने 26 नवंबर को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय जबलपुर को ज्ञापन भेजकर न्यायालय में हो रही अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके बाद 28 नवंबर को अधिवक्ता संघ के कक्ष में एक आपातकालीन आमसभा का आयोजन किया गया, जिसमें अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी 13 दिसंबर 2025 को आयोजित होने वाली लोक अदालत का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया जाएगा। संघ ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि यदि कोई भी अधिवक्ता उस दिन न्यायालयीन कार्य करता पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस जिला अधिवक्ता संघ से निरस्त कर दिया जाएगा।
अधिवक्ता रवि पांडे, हिमांशु चौरसिया सहित अन्य अधिवक्ताओं ने प्रेस वार्ता में बताया कि न्यायालय में अधिवक्ताओं और पक्षकारों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। अनेक मामलों में न्यायालीन कर्मचारियों द्वारा अनैतिक और पक्षपातपूर्ण कार्य किए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे अधिवक्ता संघ में भारी रोष व्याप्त है। अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायालय में तीन कर्मचारी लंबे समय से पदस्थ हैं, जो न केवल कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि न्यायालयीन कर्मचारियों का आर्थिक शोषण भी कर रहे हैं। संघ की मांग है कि इन कर्मचारियों का तत्काल स्थानांतरण किया जाए, अन्यथा लोक अदालत का बहिष्कार जारी रहेगा। अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायालय आने वाला हर पीडि़त पक्ष न्याय पाने का अधिकारी है, और भारतीय संविधान के अनुसार सभी को समान न्याय मिलना चाहिए। न्यायालयीन व्यवस्था में व्याप्त इन अनियमितताओं एवं पक्षपात को सुधारने तक अधिवक्ता संघ अपना कड़ा रुख बनाए रखेगा।