खरमास शुरू होने के बाद क्या करें और क्या ना करें? सारे सवालों का ज्योतिषाचार्य ने दिया जवाब, आप भी जान लें
सनातन धर्म को सबसे पुराना धर्म कहा जाता है और सनातन धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले ग्रहों की चाल को देखकर ही शुभ कार्य किए जाते हैं. इसके लिए लोग खासतौर पर ज्योतिषाचार्य से एक शुभ मुहूर्त निकलवाते हैं. फिर गृह प्रवेश, शादी और नामकरण जैसे शुभ कार्य को करते हैं. वहीं सनातन धर्म में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास यानी मलमास को ऐसा समय माना गया है, जब शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है. इस दौरान सूर्य देव के धनु राशि में प्रवेश करते ही यह अवधि शुरू होती है.
इस महीने में आध्यात्मिक साधना, जप-तप और दान-पुण्य का महत्व खासतौर पर बढ़ जाता है. वहीं इस बार पंचांग के मुताबिक, खरमास 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है, जिसके बाद सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर खरमास 15 जनवरी 2026 को समाप्त होगा. दरअसल इस दौरान लगभग एक महीने तक शादियां और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी और खरमास में लोगों के द्वारा दान-पुण्य का विशेष महत्व बढ़ जाएगा.
इन चीजों का दान होगा फलदायी
इस बारे में जब लोकल 18 की टीम ने अंबाला के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि पंचांग के अनुसार, इस बार खरमास 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है, जिसके बाद सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर खरमास 15 जनवरी 2026 को समाप्त होगा. उन्होंने कहा कि खरमास के दौरान अन्न दान का बहुत महत्व होता है, जिसमें गेहूं, चावल, वस्त्र दान में ऊनी कपड़े, कंबल और गुड़-तिल का दान शीतकाल में अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है.
उन्होंने बताया कि खरमास में विवाह और रिश्ते तय करने से परहेज करना होता है, क्योंकि इस अवधि में शादी या सगाई करना शास्त्रों में शुभ नहीं माना जाता है. उन्होंने बताया कि इस दौरान किए गए विवाह में तनाव या अनबन की आशंका बढ़ सकती है और गृह प्रवेश, मकान चेंज भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि नया घर लेना या गृह प्रवेश करना खरमास में ठीक नहीं माना जाता है. उन्होंने कहा कि नया व्यवसाय, बड़ा निवेश या कोई महत्वपूर्ण शुरुआत इस समय टालना चाहिए और नामकरण, मुंडन, कर्णवेध जैसे मांगलिक संस्कार भी खरमास में नहीं करना चाहिए.
खरमास के दौरान करें ये जरूरी काम
उन्होंने बताया कि मांगलिक कार्यों की शुरुआत 14 जनवरी के बाद ही संभव हो रही है, जबकि फरवरी 2026 से शुभ मुहूर्त पूरे जोर पर लौट आएंगे. उन्होंने कहा कि खरमास के दौरान पूजा-पाठ और भक्ति मंत्र जप, पाठ, कथा और सत्संग में समय देने से इस महीने में विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी. उन्होंने बताया कि लोग इस महीने धार्मिक स्थलों की यात्रा और पवित्र नदियों में स्नान कर सकते हैं, क्योंकि खरमास में पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत ही पुण्यकारी माना गया है.
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही लोग कुछ उपाय भी कर सकते हैं, जो इस प्रकार है कि खरमास के दिनों में प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए और उगते हुए सूरज का दर्शन करते हुए तांबे के लोटे में जल और लाल चंदन लेकर अर्घ देना है. इसके बाद गायत्री मंत्र का जाप करें और इस पूरे महीने आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें. वहीं उन्होंने बताया कि अगर आप आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं अथवा कोर्ट-कचहरी में कोई विवाद है तो खरमास के दौरान आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ जरूर करें. इसके साथ ही सूर्य कथा का जाप करें, क्योंकि ऐसा करने से कोर्ट कचहरी के मामले में सकारात्मक परिणाम मिलेगा और आर्थिक स्थिति सुधरेगी.
मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिये करें समन्वित प्रयास : मंत्री कुशवाह
लेमनग्रास -किसानों के लिए कम पानी में ज्यादा कमाई का साधन
चेकडैम बना ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार, जल संरक्षण से बदली खेती की तस्वीर
कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित : राज्यपाल पटेल
द्वारका नगरी योजना से शहरी विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से बदली तस्वीर
3147 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट का काम शुरु
वर्षा जल संरक्षण में प्रदेश का जनजातीय जिला डिंडोरी देश में प्रथम स्थान पर
चुनावी माहौल गरमाया: विवादित बयान पर खरगे घिरे, EC सख्त
किसानों को ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि के भूअर्जन पर मिलेगा बाजार दर का 4 गुना मुआवजा