IAS-IPS के खिलाफ 144 शिकायतें, प्रदेश में निपटारे के लिए ठोस कदम नहीं
भोपाल|मध्य प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों का मामला अब राज्य से निकलकर सीधे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों तक पहुंच गया है. प्रदेश के आईएएस-आईपीएस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़ी 144 शिकायतें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजी गई हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक भी शिकायत का संतोषजनक निराकरण नहीं हो सका है|इन शिकायतों को लोगों ने केंद्र सरकार के सीपी ग्राम्स (केंद्रीय लोक शिकायत निवारण पोर्टल) और अन्य माध्यमों से दर्ज कराया था. इन शिकायतों को जांच के लिए राज्य सरकार को भेजा गया, लेकिन प्रदेश में इनके निपटारे को लेकर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई|
भोपाल से दिल्ली तक पहुंचीं शिकायतें
जानकारी के अनुसार प्रदेश के आला अधिकारियों की कार्यशैली से जुड़ी शिकायतें भोपाल से लेकर दिल्ली तक लगातार भेजी जा रही हैं. इनमें प्रशासनिक लापरवाही, निर्णयों में देरी और विभागीय कामकाज से जुड़ी कई शिकायतें शामिल हैं. साल 2025 के दौरान 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच बड़ी संख्या में शिकायतें केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज की गईं. इनमें से कई शिकायतें राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग, राज्य पुलिस और अन्य विभागों से संबंधित बताई गई हैं|
सामान्य प्रशासन विभाग में सबसे ज्यादा शिकायतें
आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा शिकायतें सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़ी सामने आईं. इस विभाग से संबंधित करीब 349 शिकायतें केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से राज्य सरकार को भेजी गई थीं. इनमें से 186 शिकायतों का ही समाधान किया जा सका, जबकि 119 शिकायतें लंबित बनी हुई हैं. शिकायतों के निराकरण के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मामले विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर के थे, जिन्हें अन्य विभागों को भेजा गया|
कई विभागों में लंबित हैं मामले
प्रदेश में कई अन्य विभागों से जुड़ी शिकायतें भी बड़ी संख्या में सामने आई हैं। इनमें लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल, निर्वाचन आयोग और पुलिस विभाग से जुड़े मामलों की भी शिकायतें दर्ज की गईं. कर्मचारी चयन मंडल से जुड़ी 95 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से करीब 44 का ही संतोषजनक निराकरण हो पाया. वहीं लोक सेवा आयोग से जुड़ी शिकायतों में भी कई मामले लंबे समय तक लंबित रहे. इसके अलावा इंडस्ट्रियल और अन्य प्रमाणपत्रों से जुड़ी भी कई शिकायतें सामने आईं, जिनका निपटारा समय पर नहीं हो सका|
कुल सात सौ से ज्यादा शिकायतें
सीपी ग्राम्स पोर्टल पर सामान्य प्रशासन विभाग, लोक सेवा आयोग, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, निर्वाचन विभाग और उच्च अधिकारियों से संबंधित 747 शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें से सिर्फ 323 शिकायतों का संतोषजनक निराकरण हुआ, जबकि 324 शिकायतें साल के अंत तक लंबित बनी रहीं|
व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों के लंबित रहने से प्रदेश की शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. आम नागरिकों का कहना है कि जब शिकायतें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच रही हैं, तब भी यदि उनका समाधान नहीं हो पा रहा है तो इससे सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठते हैं|
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