केंद्रीय बैंक ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर
नई दिल्ली|बुधवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की 60वीं बैठक (RBI MPC 2026) का समापन हुआ। इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा के अलावा पांच अन्य सदस्य भी शामिल थे। 8 अप्रैल को बैठक में लिये गए फैसलों की घोषणा कर दी गई है। रेपो रेट में कोई भी बदलाव न करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है।
वर्तमान में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार है। वहीं एसडीएफ 5% और एमएसएफ 5.50% है। आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर लोन के ब्याज दर, ईएमआई और फिक्स्ड डिपॉजिट पर पड़ेगा। लोन वाले ग्राहकों को राहत मिली है।
जीडीपी ग्रोथ पर आरबीआई का ऐलान
ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की बढ़ती कीमत, होर्मुज स्ट्रेट में विवादों के कारण आपूर्ति संकट देखने को मिल रहा है। जिसके कारण 2026-27 में की गति धीमी पड़ सकती है। जिसका असर घरेलू वित्तीय स्थितियों पर भी पड़ेगा, जो विकास की संभावनाओं पर भारी पड़ सकती है। यदि संघर्ष लंबा खींचता रहा और मुख्य शिपिंग रास्तों में रुकावट बनी रही, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ेगा। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9 % लगाया है। पहली तिमाही में ग्रोथ 6.8%, दूसरी तिमाही में 6.7%, तीसरी तिमाही में 7% और चौथी तिमाही में 7. 2% होने का अनुमान है।
महंगाई पर क्या अपडेट?
विभिन्न कारकों को ध्यान में रखते हुए 2026-27 के लिए की मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान है। पहली तिमाही में महंगाई दर 4%, दूसरी तिमाही में 4.4%, तीसरी तिमाही में 5.2% और चौथी तिमाही में 4.7% रहने की संभावनाएं हैं। हालांकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और संभावित एल नीनो स्थितियों के कारण ऊर्जा की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से महंगाई दर में वृद्धि का जोखिम भी बना हुआ है। 2026-27 के लिए कोर इन्फ्लेमेशन 4.4% बने रहने का अनुमान है।
नई सीपीआई सीरीज के मुताबिक फरवरी 2026 में मुख्य मुद्रास्फीति बढ़कर 3.20% हो गई है, जो जनवरी में 2.60% थी। यह बढ़ोत्तरी मुख्य रूप से प्रतिकूल आधार प्रभाव के कारण हुई है। जबकि मुद्रास्फीति की गति धीमी ही बनी रही है। फरवरी में खाद्य मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी देखी गई थी। वहीं कोर मुद्रास्फीति में कोई बदलाव नहीं हुआ था। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा और अन्य कमोडिटी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जिसके कारण मुद्रास्फीति में काफी अनिश्चितता पैदा हो गई है। रवी की मजबूत फसल के कारण निकट अवधि में खाद्य आपूर्ति की संभावनाएं बेहतर हुई है। जिससे कुछ राहत मिली है।
पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर आरबीआई की चिंता
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर को लेकर चिंता भी व्यक्त की है। हैडलाइन महंगाई काबू में है, लेकिन टारगेट से नीचे है। इसके ऊपर जाने का जोखिम भी बढ़ चुका है। इसकी वजह से एनर्जी के कीमत में बढ़ोतरी का दबाव और मौसम में संभावित गड़बड़ियां है, जो खाने पीने की चीजों की कीमतों पर असर डाल सकती है। “सेकंड राउंड इफेक्ट” भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद पहले से ज्यादा मजबूत है, यह अतीत की तुलना में अब झटकों को झेलने के लिए ज्यादा सक्षम है। इसलिए दरों को लेकर न्यूट्रल रहने का फैसला लिया गया है। अगली बैठक 3 से 5 जून 2026 को होगी।
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