MSP विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- जनहित से जुड़ा मुद्दा, सरकार दे जवाब
नई दिल्ली: फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लेकर जारी संघर्ष एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि यह मामला न केवल किसानों के हितों से जुड़ा हुआ है, बल्कि देश की कृषि नीति, बाजार संरचना और आर्थिक संतुलन पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। याचिका में मांग की गई है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी दे। जब तक एमएसपी को कानून का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।वर्तमान व्यवस्था में सरकार कुछ फसलों के लिए एमएसपी घोषित करती है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है कि हर व्यापारी या निजी खरीददार उसी कीमत पर खरीददारी करे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि यह दोहरी मार है, क्योंकि एमएसपी कॉस्ट प्राइस से कम दिया जाता है, जबकि यह कॉस्ट प्राइस और उसके 50 प्रतिशत का योग होना चाहिए। याचिका के पक्ष में अपनी दलील रखते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार का जनता को फ्री राशन देना ठीक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसानों पर ऐसा असर पड़े कि उन्हें अपनी फसल का उचित दाम न मिले और वे सुसाइड कर लें। उन्होंने अदालत को बताया कि देश में हर साल 10 हजार से ज़्यादा किसान सुसाइड करते हैं।
प्रीमियम सेगमेंट में गूगल और एप्पल की धूम; 'नथिंग' बना सबसे तेज बढ़ने वाला ब्रांड
अर्जुन कपूर की बहन अंशुला के घर मचेगी धूम, रोहन ठक्कर बनेंगे दूल्हा
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय पूंजी बाजार ने पेश की मजबूती की मिसाल
तलाक के बाद बदली चाहत की जिंदगी, अभिनेत्री ने फिर थामा सनातन का दामन
बीडीएस छात्रा ने भी चुना मौत का रास्ता: पिता ने क्लिनिक के लिए खरीदी थी जमीन
बच्चों से सामान ढुलवाना पड़ा भारी, आजमगढ़ के स्कूल हेडमास्टर पर गिरी निलंबन की बिजली
विशेष सत्र का समापन आज: कल के विधायी झटके के बाद 11 बजे फिर शुरू होगी सदन की कार्यवाही
सबरीमाला विवाद: व्यक्तिगत आस्था बनाम संवैधानिक नैतिकता, न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र पर नजर