महिला आरक्षण कानून सुरक्षित, पर सीटों के विस्तार पर छिड़ा सियासी घमासान
नई दिल्ली: मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में पहली बार कोई विधेयक संसद में पारित होने से रुक गया है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने वाला 131वां संविधान संशोधन बिल बहुमत की कमी के कारण गिर गया। सदन में मौजूद 528 सदस्यों में से बिल को दो-तिहाई यानी 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन यह 54 वोटों से पिछड़ गया। दक्षिण भारतीय राज्यों के नेता इस बिल का कड़ा विरोध कर रहे थे।
बिल गिरने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि "तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया है।" वहीं, कांग्रेस ने इसे संविधान बचाने की जीत करार दिया, जबकि भाजपा ने विपक्ष को महिला विरोधी बताते हुए नारेबाजी की। हालांकि, महिला आरक्षण कानून (2023) सुरक्षित है और 16 अप्रैल 2026 को अधिसूचित भी हो चुका है, जिसका लाभ महिलाओं को 2034 के चुनावों से मिलना शुरू होगा।
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