क्यूबा पर ट्रंप प्रशासन की सख्ती: ईंधन और खाद्य संकट को लेकर बढ़ी चिंता
हवाना (क्यूबा) | ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा की सत्ता पर शिकंजा कसते हुए नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन कदमों का जोरदार समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई क्यूबा के आम नागरिकों के खिलाफ नहीं है। रुबियो के अनुसार, इन पाबंदियों का असल उद्देश्य उस आर्थिक तंत्र को ध्वस्त करना है जो वहां की सत्ता और सेना की ताकत को बनाए रखता है।
सैन्य कारोबारी समूह 'GAESA' बना मुख्य लक्ष्य
अमेरिका की इन ताजा पाबंदियों की सबसे बड़ी मार क्यूबा की सेना द्वारा संचालित विशाल व्यावसायिक समूह GAESA पर पड़ी है। इसके साथ ही, निकेल उत्पादन क्षेत्र में सक्रिय कनाडाई कंपनी 'शेरिट इंटरनेशनल' के संयुक्त उपक्रम 'मोआ निकेल' को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कड़े फैसले के तुरंत बाद शेरिट इंटरनेशनल ने क्यूबा से अपना 32 साल पुराना कारोबार पूरी तरह समेटने का ऐलान कर दिया है, जो क्यूबा के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका माना जा रहा है।
विदेशी निवेश पर मंडराया संकट
आर्थिक विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने इन प्रतिबंधों को क्यूबा की जर्जर अर्थव्यवस्था के लिए 'ताबूत में आखिरी कील' जैसा बताया है। जानकारों का कहना है कि नई कानूनी शक्तियों के जरिए अमेरिका अब उन तीसरे देशों की कंपनियों पर भी कार्रवाई कर सकेगा, जो क्यूबा के साथ व्यापार कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, GAESA क्यूबा की जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है, जिसमें होटल, रिटेल, और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। नए प्रतिबंधों के डर से अब विदेशी साझेदार क्यूबा से दूरी बना सकते हैं, क्योंकि कोई भी कंपनी अमेरिकी बाजार और संपत्ति को दांव पर नहीं लगाना चाहेगी।
मानवीय संकट गहराने की चेतावनी और सरकारी विरोध
दूसरी तरफ, क्यूबा सरकार ने इन पाबंदियों को 'सामूहिक सजा' करार देते हुए अमेरिका पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है। हवाना का कहना है कि इन प्रतिबंधों से आम जनता की मुश्किलें और बढ़ेंगी। क्यूबा पहले से ही ईंधन की कमी, बिजली संकट और खाद्य पदार्थों की किल्लत से जूझ रहा है। गौरतलब है कि GAESA का ढांचा 90 के दशक में सोवियत संघ के पतन के बाद सेना द्वारा तैयार किया गया था, जिसका नेतृत्व अब अनिया गिलर्मिना लास्त्रेस कर रही हैं, जिन्हें अमेरिका ने पहले ही ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
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