नए CDS और नौसेना प्रमुख के नाम तय: रक्षा नेतृत्व में बदलाव की पूरी जानकारी
नई दिल्ली | भारतीय सैन्य नेतृत्व में बड़ा फेरबदल: लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि नए सीडीएस और वाइस एडमिरल स्वामीनाथन होंगे नौसेना प्रमुख - भारत सरकार ने देश की रक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में दो अत्यंत महत्वपूर्ण नियुक्तियों की घोषणा की है। लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया गया है। वहीं, समुद्री सीमाओं की सुरक्षा की कमान अब वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन के हाथों में होगी, जिन्हें भारतीय नौसेना का नया प्रमुख (सीएनएस) बनाया गया है। इन नियुक्तियों को भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
नए सीडीएस: रणनीतिक कौशल और चार दशक का अनुभव
लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि 30 मई 2026 को जनरल अनिल चौहान की सेवानिवृत्ति के बाद कार्यभार संभालेंगे। सीडीएस के रूप में वह सैन्य मामलों के विभाग (DMA) के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। पीवीएसएम और एवीएसएम जैसे विशिष्ट पदकों से सम्मानित सुब्रमणि के पास लगभग 40 वर्षों का लंबा सैन्य अनुभव है। वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार और थल सेना के उप-प्रमुख (वाइस चीफ) जैसे उच्च पदों पर रह चुके हैं। उनकी रणनीतिक सूझबूझ पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर उनके सफल कार्यकाल के दौरान प्रमाणित हो चुकी है।
नौसेना की कमान: विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण
भारतीय नौसेना के नेतृत्व के लिए वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को चुना गया है, जो 31 मई 2026 को पदभार ग्रहण करेंगे। वर्तमान में मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख स्वामीनाथन संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। 1987 में कमीशन प्राप्त करने वाले स्वामीनाथन ने ब्रिटेन और अमेरिका के प्रतिष्ठित नेवल वॉर कॉलेजों से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा, जिसके दौरान उनसे समुद्री सुरक्षा और नौसेना की मारक क्षमता को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करने की अपेक्षा है।
रक्षा तैयारियों और संयुक्त रणनीति पर जोर
सरकार की इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य रक्षा तैयारियों में 'ज्वाइंटनेस' यानी तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। नए सैन्य नेतृत्व के तहत भारत अपनी रक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक एकीकृत सैन्य रणनीति पर जोर देगा। जानकारों का मानना है कि दोनों अधिकारियों का व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के दबदबे को बढ़ाने और सीमावर्ती सुरक्षा चुनौतियों का डटकर सामना करने में सहायक सिद्ध होगी।
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