चुनावी झटके के बाद स्टालिन का भरोसा बरकरार, बोले- लोग अब भी हमारे साथ
चेन्नई: तमिलनाडु की हालिया राजनीतिक हलचलों के बीच डीएमके (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान जारी किया है। विधानसभा चुनाव के परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही पार्टी इस बार सत्ता के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई है, लेकिन डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन कतई कमजोर नहीं हुआ है। स्टालिन ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव में 1.54 करोड़ वोट हासिल करना तमिलनाडु की जनता के उस अडिग भरोसे का प्रमाण है, जो उन्होंने इस गठबंधन पर जताया है।
सहयोगी दलों की अटूट प्रतिबद्धता पर जताया भरोसा
स्टालिन ने चुनाव के बाद गठबंधन के टूटने की अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि अधिकांश सहयोगी दलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे डीएमके के साथ अपना राजनीतिक सफर जारी रखेंगे। उन्होंने सहयोगियों के इस रुख का स्वागत करते हुए कहा, 'यह गठबंधन के प्रति अन्य दलों के नेताओं की ईमानदारी और डीएमके की नीतियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।' स्टालिन के मुताबिक, चुनावी हार-जीत से परे यह गठबंधन वैचारिक रूप से आज भी उतना ही मजबूत है जितना चुनाव से पहले था।
विपक्ष में रहकर जनता की आवाज उठाने का संकल्प
परिणामों के बाद के घटनाक्रमों पर बोलते हुए डीएमके प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी जनता के जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि चुनाव में मिले करोड़ों वोट इस बात का संकेत हैं कि प्रदेश का एक बड़ा वर्ग आज भी डीएमके की विचारधारा के साथ खड़ा है। स्टालिन ने संकल्प जताया कि गठबंधन भविष्य में भी एक प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाते हुए तमिलनाडु के हितों और जनता की समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाता रहेगा।
भविष्य की चुनौतियों के लिए संगठन को मजबूती देने पर जोर
स्टालिन ने अपने बयान के अंत में पार्टी के आंतरिक ढांचे और भविष्य की रणनीति पर भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों का गहन विश्लेषण किया जाएगा और जहां भी कमियां रही हैं, उन्हें दूर किया जाएगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से निराश न होने की अपील करते हुए कहा कि 1.54 करोड़ लोगों का समर्थन कोई छोटी उपलब्धि नहीं है और यही समर्थन आने वाले समय में डीएमके की वापसी का आधार बनेगा। फिलहाल, स्टालिन का यह बयान गठबंधन में शामिल दलों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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