किशनगढ़ थाने में दर्ज बड़ा मामला: आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए गई टीम पर दूसरा हमला, आंसू गैस का इस्तेमाल
छतरपुर। जिले के किशनगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ढौंढन-पल्कौहां में केन-बेतवा लिंक परियोजना स्थल पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आज दूसरे दिन भी ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव किया। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने जमकर पत्थर बरसाए। पुलिस को बचाव में आंसू गैस के गोले छोडऩे पड़े।
किशनगढ़ थाने में दर्ज हुई एफआईआर
इस मामले में किशनगढ़ पुलिस थाने में गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार, हिसाबी राजपूत सहित 50 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने अब तक 1 दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। अज्ञात आरोपियों की पहचान ड्रोन व फोटो-वीडियो के माध्यम से की जा रही है। पुलिस की लगभग आधा दर्जन टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी में जुटी हुई हैं। पुलिस ने इस घटना में हत्या के प्रयास, आपराधिक षड्यंत्र, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, बलवा, मारपीट समेत अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
ढोढन क्षेत्र में अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर पिछले कई दिनों से ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ था, जो अब हिंसक रूप ले चुका है। पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आगे की जांच जारी है।
जिपं सीईओ और एएसपी ने दिया साहस का परिचय
केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत ढौंढऩ गांव में अतिक्रमण हटाने गई टीम पर हुए हिंसक हमले के बीच प्रशासनिक अधिकारियों ने साहस का परिचय दिया। जब चारों ओर से पत्थरों की बौछार हो रही थी, तब एडीएम नम: शिवाय अरजरिया और एडिशनल एसपी आदित्य पाटले ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बीमार आरक्षक को जीवनदान दिया। अधिकारियों की इस सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता की अब चारों ओर प्रशंसा हो रही है।
ढौंढऩ गांव में कार्रवाई के दौरान सैकड़ों ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया था। इसी अफरा-तफरी के बीच ड्यूटी पर तैनात आरक्षक किशोर नायक अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण थी और सामने से भीड़ लगातार हमलावर थी, लेकिन एडीएम और एडिशनल एसपी ने पीछे हटने के बजाय आरक्षक को तुरंत सीपीआर देना शुरू किया। गंभीर हालात में समय पर मिली इस चिकित्सीय मदद से आरक्षक की सांसें लौट आईं।
होश में आने के बाद आरक्षक किशोर नायक को तत्काल राजनगर स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। एडीएम नम: शिवाय अरजरिया ने घटना को याद करते हुए बताया कि उस वक्त प्राथमिकता केवल आरक्षक की जान बचाना थी। समय पर सीपीआर मिलने से एक बड़ा हादसा टल गया और उपचार के बाद आरक्षक सुरक्षित अपने घर लौट गए हैं।
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