बकस्वाहा। बकस्वाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एम्बुलेंस व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। मंगलवार को सामने आए दो मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहला मामला बकस्वाहा व्यवहार न्यायालय से जुड़ा है। अधिवक्ता सुखदेव प्रजापति सुबह करीब 11 बजे न्यायालय पहुंचे थे, तभी उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द होने लगा। साथी अधिवक्ताओं ने तत्काल उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक जांच के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण उन्हें निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। रास्ते में पर्याप्त चिकित्सीय सहायता और ऑक्सीजन जैसी सुविधाएं न मिलने से उनकी मौत हो गई।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बृजेश बिल्थरे ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर न तो समय पर डॉक्टर मिले और न ही एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध थी। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरा मामला ग्राम कूड़ाजनी की निवासी कविता यादव का है, जिन्हें प्रसव के लिए बकस्वाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। जांच के बाद चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण महिला घंटों प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। परिजनों ने बताया कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद एम्बुलेंस नहीं पहुंची। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने बकस्वाहा की स्वास्थ्य सेवाओं और एम्बुलेंस व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।