साइबर अपराधियों का नया जाल, CBI का डर दिखाकर की करोड़ों की ठगी
ग्वालियर। शहर में ऑनलाइन धोखाधड़ी की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है. शातिर साइबर अपराधियों ने एक 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला, मीनाक्षी नाखरे को करीब 33 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' (इंटरनेट पर बंधक) रखकर 1.58 करोड़ रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली. मीनाक्षी एक सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन हैं. जालसाजों ने खुद को दूरसंचार विभाग, दिल्ली पुलिस और सीबीआई का आला अफसर बताकर महिला को डराया और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले से बरी करने का झांसा देकर मोटी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा ली. पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि ठगी के पैसे शुरुआत में चार करंट बैंक खातों में भेजे गए थे, जहां से बाद में इन्हें 129 अन्य बैंक खातों में फैला दिया गया.
मनी लॉन्ड्रिंग और गिरफ्तारी का दिखाया खौफ
सरदार पाटनकर साहब का बाड़ा क्षेत्र की रहने वाली मीनाक्षी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि बीते 10 मई को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात कॉल आया था. फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम डिपार्टमेंट का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके नाम पर रजिस्टर्ड एक सिम कार्ड और बैंक अकाउंट का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए हो रहा है. ठग ने कहा कि इस खाते से 6.80 करोड़ रुपये का अवैध हेरफेर हुआ है. इसके तुरंत बाद कॉल को दिल्ली पुलिस के एक कथित अफसर के पास ट्रांसफर कर दिया गया.
अगले चरण में, वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स सामने आया, जिसने खुद का परिचय आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम के रूप में दिया. उसने महिला पर आरोप लगाया कि इस गैरकानूनी लेनदेन के बदले उन्हें 68 लाख रुपये का कमीशन मिला है. इसके बाद अपराधियों ने महिला को जेल जाने से बचने के लिए एक गुप्त जांच (प्रायोरिटी इन्वेस्टिगेशन) में सहयोग करने का दबाव बनाया.
डरा-धमकाकर पार करा दी जीवनभर की पूंजी
इसके बाद खुद को सीबीआई का अधिकारी बताने वाले एक अन्य जालसाज ने कमान संभाली. उसने महिला से कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक उनकी सारी जमा-पूंजी को सरकार के सुरक्षित खातों में ट्रांसफर करना होगा, जो तफ्तीश पूरी होने के बाद लौटा दी जाएगी. डर और झांसे में आकर मीनाक्षी ने बैंक में मौजूद अपनी चार फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वा दीं. उन्होंने 33 दिनों के भीतर ठगों के बताए खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये भेज दिए. यह रकम उन्हें हाल ही में अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने से मिली थी.
एनओसी न मिलने पर हुआ धोखे का अहसास
11 जून को जालसाजों ने महिला से कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और 18 जून तक उन्हें क्लीन चिट की एनओसी डाक के जरिए मिल जाएगी. हालांकि, इसी बीच 16 जून को ठगों के सभी संपर्क नंबर अचानक बंद हो गए. तय तारीख तक जब कोई सरकारी कागज नहीं पहुंचा, तो महिला को अनहोनी की आशंका हुई. वह सच्चाई जानने के लिए आरोपियों के बताए दिल्ली वाले पते पर भी गईं, जहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि वे एक बड़े फ्रॉड का शिकार हो चुकी हैं. इसके बाद उन्होंने वापस आकर स्थानीय पुलिस स्टेशन में इस मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.
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