सरकार 5 बैंकों में हिस्सेदारी घटाएगी, SEBI के मानकों को पूरा करने के लिए उठाया कदम
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पांच सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को 20 प्रतिशत तक कम करने की योजना बनाई है. खबर के मुताबिक सरकार ऐसा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों को पूरा करने के लिए कर रही है. सेबी के नियम कहते हैं कि हर सूचीबद्ध कंपनी में कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा आम लोगों के पास होना चाहिए. अभी इन बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से ज्यादा है, जिसे कम करने की तैयारी है.हिस्सेदारी कम करने के लिए दो रास्ते हैं. पहला तरीका है कि सरकार खुद शेयर बाजार में या बड़े निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचे. दूसरा तरीका यह है कि बैंक खुद बड़े निवेशकों को अपने शेयर बेचें. दोनों ही तरीकों से बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी कम होगी और सेबी के नियम पूरे होंगे. अभी इन बैंकों में सरकार का हिस्सा काफी ज्यादा है, जिसे नियमानुसार कम करना जरूरी हो गया है.
इन पांच बैंकों में घटेगी हिस्सेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बैंकों में हिस्सेदारी घटाई जाएगी, उनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं. सरकार यह काम निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम), वित्तीय सेवा विभाग और बैंकों के साथ मिलकर कर रही है. इसके लिए ऑफर-फॉर-सेल (ओएफएस) और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) जैसे तरीकों का इस्तेमाल हो सकता है. यानी सरकार अपनी हिस्सेदारी खुले बाजार में या बड़े निवेशकों को बेच सकती है.एक अधिकारी के मुताबिक सरकार का लक्ष्य इन बैंकों में अपनी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से नीचे लाना है. इसके लिए निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) शेयर बिक्री की अनुमति दे सकता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ये पांचों बैंक अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों की तुलना में सस्ते नहीं हैं. बैंकों की कीमत को प्राइस-टू-बुक नामक तरीके से मापा जाता है, जो वित्तीय कंपनियों के मूल्यांकन का एक आम मानक है. इससे बैंकों में निजी निवेश बढ़ेगा और उनकी स्थिति मजबूत होगी.
मर्चेंट बैंकर देंगे सरकार को सलाह
दीपम ने मर्चेंट बैंकरों से बोलियां मांगी थीं. ये बैंकर अगले तीन साल तक सरकार को सलाह देंगे कि हिस्सेदारी कैसे और कब बेची जाए. यह अवधि एक साल और बढ़ाई भी जा सकती है. मर्चेंट बैंकरों का काम होगा कि वे सरकार को सही समय और तरीका बताएं ताकि हिस्सेदारी बिक्री आसानी से हो सके.
यह कदम सरकारी बैंकों को मजबूत करने और उनकी वित्तीय स्थिति सुधारने की दिशा में भी देखा जा रहा है. हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को पैसा मिलेगा, जिसे दूसरे जरूरी कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है. लोगों को अब इंतजार है कि यह योजना कब से शुरू होगी और बाजार पर इसका क्या असर पड़ेगा.
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