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नई दिल्ली। बीते 12 सालों में इस साल सबसे ज्यादा बारिश उत्तर भारत में हुई है। यहां अब तक सामान्य से 21 प्रतिशत ज्यादा पानी गिरा है। पिछले साल अगस्त में भारी (64.4-115.5एमएम) से बहुत भारी वर्षा (115.5-204.4एमएम) की घटनाएं ज्यादा हुई थीं, लेकिन अत्यंत भारी वर्षा की घटनाएं इस साल के मुकाबले कम थीं। पिछले साल उत्तर भारत में अगस्त का महीना 1996 के बाद (28 वर्षों में) सबसे अधिक बरसात वाला रहा। पूरे क्षेत्र में 256.4एमएम बारिश दर्ज की गई थी। लेकिन, इस साल मौजूदा महीने में अभी तक (26 अगस्त तक) 209.4 एमएम वर्षा दर्ज हो चुकी है और पांच दिन बाकी हैं। मौसम विभाग के मुताबिक अभी एक या दो दिन यही स्थिति बनी रह सकती है।
आईएमडी के अनुसार 25 अगस्त तक उत्तर भारत में अत्यंत भारी बारिश की 21 घटनाएं दर्ज की हैं, जो कि पिछले साल की ऐसी 14 घटनाओं से कहीं ज्यादा है। 2013 के मानसून में ही उत्तराखंड में केदारनाथ वाली तबाही आई थी। सबसे चिंताजनक बात ये है कि अगस्त में इस इलाके ने अबतक सबसे ज्यादा अत्यंत भारी वर्षा वाले दिन दर्ज किए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 2021 से यह डेटा जुटाना शुरू किया है। आशंका है कि इस महीने के अंत तक अत्यंत भारीवर्षा वाली घटनाओं की संख्या और बढ़ेगी, जिससे हाल के वर्षों में यह सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाले मानसून में शामिल हो जाएगा। आईएमडी के मुताबिक अत्यंत भारी वर्षा का मतलब है, जब किसी जगह पर 24 घंटे में 204.5एमएम से अधिक बारिश होती है। यही नहीं, इस बार के मानसून में उत्तर भारत ने अबतक के तीनों महीनों (जून, जुलाई, अगस्त) में सरप्लस बरसात दर्ज की है, जो कि देश के चारों क्षेत्रों में सबसे अधिक है और यह भी 2013 के बाद पहली बार हो रहा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही अत्यधिक बारिश
आईएमडी प्रमख मृत्युंजय महापात्रा के अनुसार, पिछले दो महीनों में उत्तर पश्चिम भारत (मौसम विभाग के हिसाब से उत्तरी भारत) में खूब बारिश हुई है। इसका मुख्य कारण है, पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आने वाली मॉनसूनी हवाओं का बार-बार टकराना। कभी-कभी अरब सागर से भी मानसूनी हवाएं आती हैं। आईएमडी उत्तर पश्चिम भारत में जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को शामिल करता है। आईएमडी के अनुसार अत्यंत भारी वर्षा की ज्यादातर घटनाएं हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर में हुई हैं।
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