दुधमुंहे बच्चे को अकेला छोड़ नवरात्रि में भागी मां, प्रेमी के संग भागने की घटना से प्लेटफार्म पर हड़कंप
उमरियाः जिले के रेल्वे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक नवरात्रि के चलते भीड़ थी। स्टेशन पर बनी कुर्सी में देर रात चौंकाने वाला नजारा दिखा। यात्रियों और जीआरपी की नजरें तब ठहर गईं जब 8 माह का मासूम अकेला रोता हुआ मिला। बच्चे को रोता देखकर जीआरपी ने उसके परिजन को तलाश किया। लेकिन कहीं किसी का पता नहीं चला। जीआरपी ने दुधमुंहे मासूम को अपनी निगरानी में लेकर सुरक्षित किया और तत्काल जिला अस्पताल लेकर आए। बच्चे की जांच करवाया साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना दी।
बच्चे की देखरेख और जांच
महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर बच्चे की सुपुर्दगी ली और उसकी देखभाल शुरू करवाई। वहीं, कुछ घंटों में जीआरपी ने बच्चे के परिजन को ट्रेस कर लिया और उनको सूचना देकर बुलाया। उनको बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत कर दिया। अब उस पर बाल कल्याण समिति परिक्षण करने में जुटी है।
मासूम के पिता ने बताई पीड़ा
बच्चे के पिता सुनील रैदास बड़वार गांव का रहने वाला है। उसने बताया कि मेरी पत्नी का नाम सुनैना रैदास है और बच्चे का नाम अंश है। बेटा 8 माह का है। उसने बताया कि पत्नी सुनैना ने रैदास का इलाज कराने के बहाने घर से निकली थी। रास्ते में वह ब्यूटी पार्लर भी गई। बाद में कटनी चली गई। वहां, लौटकर मासूम को लौटकर मासूम को उमरिया स्टेशन पर छोड़ दिया। फिर खुद गायब हो गई।
पहले भी छोड़कर भाग चुकी है कलयुगी मां
सुनील का आरोप है कि पत्नी ने बच्चे को 50 हजार में बेचने की कोशिश भी की है। उन्होंने कहा कि पत्नी पहले भी 6-7 माह की बच्ची को छोड़कर भाग चुकी है। तब वह 3-4 माह बाद आई थी। पति ने कहा कि वह अब उस पत्नी को नहीं रखेगा। मैं अपने बच्चे को रखूंगा। मेरे पास प्रूफ है, उसका जन्म प्रमाणपत्र है उसकी फोटो है।
दादी ने बहू को लेकर जो बताया
बच्चे की दादी शांति बाई ने बताया कि बड़ी बहू सुबह घर निकली थी। उसने बताया कि इलाज कराने अस्पताल जा रही है। लेकिन शाम को सूचना मिली कि वह भाग गई। पहले भी वह घर छोड़ चुकी है। तीन- चार महीने बाद लौटी तो समाज की बैठक के बाद लौटकर आई थी। उसकी 2 साल की बेटी और 8 माह का बेटा है।
अधिकारियों की कार्रवाई
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी दिव्या गुप्ता ने बताया कि बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया है। डीएनए जांच और परिजनों के बैकग्राउंड की पुष्टि के बाद ही बच्चे की सुपुर्दगी पर फैसला होगा। फिलहाल मासूम को शिशु गृह शहडोल भेज दिया गया है।
सवाल खड़े करती घटना
आम तौर पर मां को बच्चे का सबसे सुरक्षित सहारा माना जाता है। लेकिन इस घटना में मां ने ही अपने मासूम को प्लेटफार्म पर छोड़ दिया। सवाल यह उठता है कि एक मां इतनी निर्दयी कैसे हो सकती है? कलेजे के टुकड़े को छोड़ते वक्त जरा सा भी नहीं लगा कि प्लेटफार्म पर कुत्ता या कोई भी जानवर नुकसान पहुंचा देगा तो क्या स्थिति होगी? हालांकि यह घटना सवाल खड़े करती है।
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