पांचवें अध्याय  के साथ जन्म स्थली में बागेश्वर महाराज की  सत्यनारायण कथा का हुआ विराम
छतरपुर। देश का यह पहला अवसर है जब कहीं श्री सत्यनारायण की कथा संगीतमय हो रही है। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपनी जन्मस्थली में धर्म प्रेमियों को श्री सत्यनारायण की कथा श्रवण करा रहे हैं। तीन दिवसीय इस कथा महोत्सव के विराम दिवस पर महाराज श्री ने कहा कि भगवान सत्यनारायण को कोई सत्यदेव कहता है, कोई सत्य भी कहता है। कलयुग में सत्यदेव की महिमा अपरंपार है। सत्यदेव ही कल्याण कारक है। बिना सत्य के सहारे यह जीवन माया के बंधनों से मुक्त नहीं हो सकता।
बागेश्वर महाराज ने तृतीय दिवस की कथा में कहा कि कार्य सिद्धि के लिए धर्म का सहारा लेना होता है। उन्होंने कहा कि जन्म अद्र्ध  विराम है, जीवन अल्पविराम जबकि मृत्यु पूर्ण विराम है। स्कंद पुराण में उल्लेख किया गया है कि कलयुग में जब चारों तरफ पाप बढ़ेंगे तो लोगों को कल्याण के लिए श्री सत्यनारायण व्रत कथा का सहारा लेना पड़ेगा। यही कथा लोगों का कल्याण करेगी। विराम दिवस की कथा में जहां बद्रीनाथ धाम के पूज्य बालक योगेश्वर दास महाराज उपस्थित हुए। वहीं मलूक पीठ से पूज्य गिरधर दास महाराज, महर्षि वेद विज्ञान संस्था के प्रधानाचार्य पं.ओमप्रकाश शर्मा सहित अन्य संतगण उपस्थित रहे।
महाराज श्री 3 जनवरी को धाम में सुनाएंगे सामूहिक कथा
बागेश्वर महाराज ने कहा कि सभी को तीन, पांच या सात श्री सत्यनारायण कथा करने का संकल्प लेना चाहिए। हर साल लोग श्री सत्यनारायण कथा का श्रवण करेंगे तो वह सत्य से जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि 3 जनवरी 2026 को वे बागेश्वर धाम में सैकड़ो लोगों के साथ सामूहिक रूप से श्री सत्यनारायण कथा सुनाएंगे। इस कथा में शामिल होने वाले यज्ञमानों को रजिस्ट्रेशन का भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।
जन्मभूमि में कथा कर चुकायें मातृभूमि का ऋण: योगेश्वर दास महाराज
बद्रीनाथ धाम से पधारे पूज्य बालक योगेश्वर दास महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सत्यनारायण कथा सभी को अपनी जन्मभूमि में अवश्य कहना चाहिए। धीरे-धीरे लुप्त होने वाली इस कथा को बागेश्वर महाराज ने जीवंत कर दिया है। सभी संत अपनी जन्मभूमि में श्री सत्यनारायण कथा अवश्य कहे। उन्होंने कहा कि जन्मभूमि का ऋण वैसे तो कभी नहीं उतारा जा सकता लेकिन श्री सत्यनारायण कथा सहित भागवत चरित्र श्रवण कराकर ऋण को कम किया जा सकता है। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपनी जन्मभूमि में श्री सत्यनारायण की कथा अवश्य करेंगे।