एमपी में खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा, उज्जैन में बनेगी आधुनिक रेफरल लैब, अन्य राज्यों के सैंपल का भी होगा परीक्षण
उज्जैन | प्रदेश के तीन जिलों में विषाक्त कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में खाद्य पदार्थों और औषधियों की जांच के लिए बड़ी लैब बनाने की तैयारी है। यहां उज्जैन के आसपास के जिलों से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा भेजे गए सैंपलों की जांच के साथ ही इसका रेफरल लैब की तरह भी काम होगा।
यह है रेफरल लैब
रेफरल लैब में पहले किसी लैब में परीक्षण किए जा चुके सैंपलों की जांच की जाती है। दूसरे राज्य भी यहां जांच के लिए सैंपल भेज सकेंगे। पड़ोसी राज्य राजस्थान, छत्तीसगढ़ में अभी कोई रेफरल लैब नहीं है, ऐसे में वहां के सैंपल भी जांच के लिए उज्जैन आ सकते हैं। मध्य प्रदेश के रेफरल सैंपल अभी मैसूर या पुणे भेजे जाते हैं। किसी लैब में कोई सैंपल फेल होने पर उत्पादक, थोक या खुदरा व्यापारी द्वारा अपील किए जाने पर दोबारा सैंपलों की जांच रेफरल लैब में ही की जाती है।
शासन को भेजा प्रस्ताव
लैब बनाने का प्रस्ताव खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने तैयार कर शासन को भेजा है। अब इसे कैबिनेट में रखा जाएगा। इसे बनाने में 45 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। लैब में प्रतिवर्ष खाने-पीने की चीजों के 10 हजार सैंपलों की जांच की जा सकेगी। प्रदेश में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए पिछले वर्ष तक एक मात्र शासकीय लैब भोपाल में थी, जिसकी क्षमता छह हजार सैंपल प्रतिवर्ष जांचने की है।
एक माह पहले इंदौर में भी लैब प्रारंभ हुई है। इसके बाद जबलपुर और फिर ग्वालियर में खाद्य एवं औषधि जांच की लैब प्रारंभ की जाएंगी। यानी उज्जैन की लैब जांच क्षमता और संसाधनों की दृष्टि से सबसे बड़ी होगी। औषधियों के सैंपलों का परीक्षण भी यहां हो सकेगा, पर इसके लिए रेफरल लैब नहीं होगी।
लैब में होंगी ये विशेषताएं
- खाने-पीने की चीजों में किसी तरह का केमिकल मिला होने पर जांच में पता चल सकेगा।
- सभी तरह के हैवी मेटल की जांच लैब में की जा सकेगी।
- माइक्रोबायोलाजी जांच के अंतर्गत खाने-पीने की चीजों में सभी तरह के बैक्टीरिया और फंगस का पता लगाया जा सकेगा।
- ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि सैंपलों की जांच रिपोर्ट अधिकतम 14 दिनों में आ जाए। रेफरल सैंपलों की जांच और कम दिन में करने की योजना है।
एफएसएसएआई से मिलेगी मान्यता
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि रेफरल लैब को मान्यता खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) देता है। लैब का निर्माण केंद्र सरकार या राज्य सरकार अपने बजट से करती हैं, जिसके निरीक्षण के बाद एफएसएसएआई मान्यता देता है। इसके बाद एफएसएसएआई की निगरानी में ही लैब संचालित होती है। केंद्र से अलग कामों के लिए अनुदान भी मिलता रहता है।
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