चीन मिटा रहा तिब्बती पहचान, स्तूप तोड़े, बौद्ध मंत्र हटाकर चीनी झंडे लगाए
कोलंबो। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) तिब्बती पहचान को मिटाने की लगातार कोशिशें कर रही है। भाषा, धर्म और संस्कृति को निशाना बनाया जा रहा। एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी प्रशासन तिब्बती धार्मिक प्रतीकों को हटाकर उनकी जगह जबरन चीनी राष्ट्रवादी प्रतीक थोप रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि तिब्बत की पहाड़ियों पर पत्थरों में उकेरे गए पवित्र बौद्ध मंत्र ओम मणि पद्मे हम को हटाकर वहां चीनी झंडा लगा दिया है। यही नहीं तिब्बती खानाबदोशों को पारंपरिक मणि प्रार्थना ध्वज हटाने के लिए मजबूर किया और उसकी जगह चीनी झंडे लगाने को कहा। इसके साथ ही लोगों को राजनीतिक री-एजुकेशन यानी वैचारिक प्रशिक्षण सत्रों में भी शामिल किया गया।
एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि तिब्बत में सांस्कृतिक दमन हाल के वर्षों में और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में चीनी अधिकारियों ने आग लगने के खतरे का हवाला देते हुए पारंपरिक प्रार्थना ध्वज जला दिए। स्थानीय लोगों ने इसे तिब्बती धार्मिक परंपराओं को मिटाने की चीन की मुहिम का नया और गंभीर कदम बताया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले कुछ सालों में कई बार मणि प्रार्थना ध्वज और प्रार्थना चक्रों को हटाया गया या तोड़ दिया गया। ये कार्रवाइयां बिना किसी ठोस या तार्किक कारण के की गईं।
इसी दौरान जब तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का 90वां जन्मदिन मनाया जा रहा था, तब चीनी प्रशासन ने तिब्बत में आवाजाही और धार्मिक गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां लगा दीं। रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग बीजिंग के री-एजुकेशन प्रोग्राम का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं, उन्हें झूठे आरोपों में हिरासत, लंबी कैद और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। इटली के धर्म समाजशास्त्री ने इन घटनाओं को अपमान और पवित्रता का हनन बताया। उन्होंने कहा कि सीसीपी तिब्बती धर्म और संस्कृति को खत्म कर उसकी एक बनावटी, पर्यटकों के लिए बनाई गई डिज्नी जैसी छवि छोड़ना चाहती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 के मध्य में तिब्बत के खाम प्रांत में करीब 300 बौद्ध स्तूपों को तोड़ दिया गया। सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) ने इसे सांस्कृतिक तोड़फोड़ का खुला कृत्य बताया है, जिसने दुनियाभर के तिब्बतियों को गहरा आघात पहुंचाया है। सीटीए का कहना है कि चीनी अधिकारी इन ध्वंस कार्रवाइयों को सरकारी जमीन और नियमों के उल्लंघन का बहाना बनाकर सही ठहराते हैं, लेकिन पवित्र स्तूपों का मलबा पूरी तरह हटा दिया गया है, जिससे सदियों पुरानी आस्था के निशान भी मिट गए।
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