छोटे, तेज और झुंड में हमला करने वाले ड्रोन को होगा सफाया.........चीन ने तैयार किया ‘हरिकेन 3000’ गोलाबारूद से नहीं बिजली से चलेगा ये घातक हथियार
बीजिंग । समय के साथ दुनिया में युद्ध का स्वरूप भी बदल गया है। जहां पहले लड़ाइयां जमीन पर होती थीं, वहीं अब आधुनिक युद्ध में ड्रोन सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। छोटे, तेज और झुंड में हमला करने वाले ये ड्रोन टैंकों, एयरबेस और शहरों तक को निशाना बनाते हैं। इसके जवाब में हर देश इसतरह का एयर डिफेंस सिस्टम बनाने में लगा है, जो कम खर्च में इन ड्रोन झुंडों का सफाया कर सके। परंपरागत मिसाइल और तोप आधारित सिस्टम महंगे हैं और बड़े पैमाने पर ड्रोन नष्ट करना चुनौतीपूर्ण है। इस कमी को देखकर चीन ने एक ऐसा समाधान निकाला है, जिसने दुनिया को चौंका दिया है।
चीनी सरकारी रक्षा कंपनी नोरिन्को ने ‘हरिकेन 3000’ नामक हाई-पावर माइक्रोवेव (एपपीएम) हथियार विकसित किया है। यह कोई सामान्य मिसाइल या तोप नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर हमला करने वाला एक अत्याधुनिक हथियार है। ट्रक पर लगे सिस्टम से निकली माइक्रोवेव किरणें दुश्मन के ड्रोन के कंट्रोल और सर्किट को नुकसान पहुंचाती हैं। इसके चलते ड्रोन हवा में ही बर्बाद हो जाते हैं। नोरिन्को के अनुसार, यह हथियार 3 किलोमीटर तक छोटे और हल्के ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है, और यह पूरे झुंड को एक साथ रोक सकता है।
हरिकेन 3000 का पहला प्रदर्शन 2024 में झुहाई एयर शो में हुआ था, जबकि सितंबर 2025 में चीन की सैन्य परेड में सार्वजनिक रूप से पेश किया। इस हथियार का संचालन अत्याधुनिक सेंसर और रडार सिस्टम से होता है। रडार उड़ते ड्रोन का पता लगाता है और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर उन्हें लॉक करता है। इसके बाद माइक्रोवेव किरणें ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में प्रवेश कर निष्क्रिय कर देती हैं। इस प्रक्रिया में न विस्फोट होता है और न ही मलबा फैलता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में कोई नुकसान नहीं होता।
विशेषज्ञों का कहना है कि हरिकेन 3000 का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस चलाने के लिए गोलाबारूद की जरूरत नहीं होती। बिजली उपलब्ध रहने तक यह हथियार लगातार हमला कर सकता है। इसकी लागत भी पारंपरिक मिसाइलों के मुकाबले बहुत कम है। अमेरिका के पास भी ऐसा ही हथियार है, इस ‘लियोनिडास’ कहते हैं, लेकिन इसकी रेंज केवल दो किलोमीटर है। चीन का दावा है कि हरिकेन 3000 इससे कहीं अधिक दूरी तक प्रभावी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य की लड़ाई अब तरंग आधारित तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक हथियारों के इर्द-गिर्द घूमेगी, और गोले-बारूद की जगह हाई-पावर माइक्रोवेव हथियार युद्ध के नए स्वरूप में प्रमुख भूमिका निभाएंगे। हरिकेन 3000 की क्षमताओं ने न केवल चीन की वायु रक्षा प्रणाली को सशक्त किया है, बल्कि वैश्विक सैन्य तकनीक की दिशा को भी बदलने की चेतावनी दी है। भविष्य में ड्रोन हमलों के खिलाफ इसका उपयोग युद्धक्षेत्र में निर्णायक साबित हो सकता है।
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