फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है होलाष्टक काल
लखनऊ|राजधानी लखनऊ में होली की रौनक हर तरफ देखने को मिल रही है। लोग खरीदारी करने में जुटे हैं, लेकिन होली से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। इस दौरान शुभ कार्य और खरीदारी वर्जित रहती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो रहा है, जो तीन मार्च को होलिका दहन तक रहेगा।आचार्य डॉ. प्रदीप द्विवेदी 'रमण' बताते हैं कि होलाष्टक की अवधि ग्रह-नक्षत्रों की उग्र स्थिति और पौराणिक घटनाओं की वजह से विशेष महत्व रखती है। यह होली से ठीक आठ दिन पहले शुरू होता है। इन दिनों को ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की अशुभ स्थिति वाला समय माना जाता है। चंद्रमा, सूर्य, शनि और राहु जैसे ग्रह उग्र रूप धारण करते हैं, जिससे निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, इसलिए कोई भी नया या महत्वपूर्ण काम शुरू करने से बचना चाहिए।
ये कार्य करने से बचें
होलाष्टक के दौरान शुभ या मांगलिक कार्य से बचना चाहिए। ऐसा करने से कार्य में असफलता, विवाद या नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। भविष्य में बाधाएं आ सकती हैं, क्योंकि ये दिन परीक्षा और संयम के हैं। विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, नया व्यवसाय, वाहन या कीमती वस्तु खरीदना, ग्रह शांति जैसी पूजा करने से बचें।
इसलिए रुक जाते हैं मांगलिक कार्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है। इन आठ दिनों तक असुर राज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र और परम विष्णु भक्त प्रह्लाद को भीषण यातनाएं दी थीं। भक्ति की परीक्षा और कष्ट के इन दिनों के कारण इसे अशुभ माना जाता है।
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