अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा टकराव, विमान गिराने की खबर से दोनों देश आमने-सामने
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बीते 28 फरवरी से जारी युद्ध को रोकने के लिए दोनों देशों के बीच शांति वार्ता (बातचीत) चल रही थी। लेकिन इसी बीच खबर आई कि अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर हमला कर दिया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इस कथित हमले के बाद ईरान ने भी बड़ा दावा किया है कि उसकी सेना ने अपने बुशहर इलाके में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया है। हालांकि, अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया है।
ईरान का विमान गिराने का दावा और अमेरिका का पलटवार
शुक्रवार की सुबह ईरान के सरकारी मीडिया ने देश के बुशेहर प्रांत के जाम काउंटी के गवर्नर मसूद तंगस्तानी के हवाले से एक खबर चलाई। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने सीमा में घुस रहे एक अमेरिकी विमान को मार गिराया है। इसके साथ ही ईरान ने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास सैन्य हलचल बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इस दावे के सामने आते ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने तुरंत मोर्चा संभाला। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि ईरान का अमेरिकी विमान गिराने का दावा पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत है। अमेरिका के सभी विमान और सैन्य संसाधन पूरी तरह सुरक्षित हैं और वे अपना काम कर रहे हैं।
शांति वार्ता के बीच फिर बढ़ा भारी तनाव
दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही जंग को रोकने के लिए पिछले कुछ समय से शांति समझौते को लेकर बातचीत का दौर चल रहा था। लेकिन शांति वार्ता के दौरान ही अचानक आई इस खबर ने दोनों देशों के बीच कड़वाहट और ज्यादा बढ़ा दी है। इस घटनाक्रम से ऐसा लगने लगा है कि शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है। हालांकि, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि उसकी तरफ से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है जिससे शांति वार्ता पर असर पड़े।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी के बाद ही होगा अंतिम फैसला
इस पूरे विवाद और शांति वार्ता के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि वॉशिंगटन (अमेरिका) और तेहरान (ईरान) के बीच युद्ध को रोकने के लिए बातचीत का सिलसिला अभी भी जारी है। लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इस शांति समझौते पर कोई भी अंतिम फैसला या मुहर तभी लगेगी, जब देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पर अपनी पूरी सहमति और मंजूरी दे देंगे। तब तक दोनों देशों के बीच जमीनी हालात पर नजर रखी जा रही है।
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