कटौती के खिलाफ वृद्धा की जीत, अधिकरण ने सुनाया महत्वपूर्ण आदेश
जबलपुर: केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT - कैट) ने जबलपुर की रहने वाली एक 91 वर्षीय बुजुर्ग महिला श्यामा देवी झा के पक्ष में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें एक बहुत बड़ी राहत दी है। अधिकरण ने महिला के दिवंगत पति के निधन के बाद मिल रही पारिवारिक पेंशन (फैमिली पेंशन) से 3.33 लाख रुपये की वसूली करने के विभागीय आदेश पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी है। आयुध निर्माणी (ऑर्डनेंस फैक्ट्री) विभाग द्वारा पूर्व में कथित तौर पर अधिक भुगतान (ओवर पेमेंट) होने का हवाला देकर यह रिकवरी राशि निकाली गई थी। इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ पीड़िता ने अधिवक्ता आकाश सिंघई के माध्यम से अधिकरण की शरण ली थी। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद कैट ने वृद्धा के तर्कों को प्रथम दृष्टया सही पाया और संबंधित विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश के बाद फिलहाल पेंशन राशि से होने वाली किसी भी प्रकार की कटौती पर पूरी तरह से रोक लग गई है।
14 साल पुराने मामले में विभाग की गलती का खामियाजा भुगत रही थीं वृद्धा
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, श्यामा देवी झा के पति शंभू दयाल झा रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली आयुध निर्माणी में अपनी सेवाएं दे चुके थे। सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद वे नियमित पेंशन पा रहे थे, परंतु वर्ष 2012 में उनके आकस्मिक देहांत के बाद नियमानुसार उनकी पत्नी श्यामा देवी के नाम पर पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई थी।
विभाग के प्रशासनिक अमले ने करीब 14 साल के एक लंबे अंतराल के बाद अचानक एक नया आदेश जारी कर दिया, जिसमें कहा गया कि तकनीकी त्रुटि के कारण उन्हें निर्धारित सीमा से अधिक राशि ट्रांसफर हो गई थी, जिसकी भरपाई के लिए 3.33 लाख रुपये वापस लिए जाएंगे। बुजुर्ग महिला ने अपनी याचिका में पुरजोर दलील दी कि इस कथित अतिरिक्त भुगतान में उनकी न तो कोई भूमिका थी और न ही उन्होंने विभाग के समक्ष कोई झूठा या भ्रामक विवरण प्रस्तुत किया था। अतः विभाग की खुद की लापरवाही का खामियाजा इस उम्र में उन्हें भुगतने के लिए विवश करना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
जीवन-यापन के इकलौते सहारे को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई
अदालत में याचिकाकर्ता का पक्ष मजबूत करते हुए उनके अधिवक्ता ने अधिकरण के समक्ष यह बात रखी कि इस अत्यधिक वयोवृद्ध अवस्था में पेंशन ही महिला के भरण-पोषण, दवाओं के खर्च और सम्मानजनक जीवन-यापन का एकमात्र जरिया है। ऐसे में उनकी बुनियादी आय से इतनी बड़ी रकम की कटौती करना उनके जीवन जीने के संवैधानिक अधिकारों का सीधा हनन होगा।
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने मामले के मानवीय और विधिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए रिकवरी की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्देश दिया। इस जटिल मामले की अगली सुनवाई अब आयुध निर्माणी विभाग का आधिकारिक जवाब दाखिल होने के बाद तय की जाएगी, लेकिन तब तक के लिए बुजुर्ग महिला को उनकी पूरी पेंशन राशि पूर्व की भांति ससम्मान मिलती रहेगी। इस फैसले की भोपाल और जबलपुर के कानूनी हलकों में काफी सराहना हो रही है।
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