‘गीदड़’ बयान पर कांग्रेस की नाराज़गी, BJP ने किया पलटवार
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। साल 2022 में शिवसेना के भीतर हुई ऐतिहासिक बगावत के बाद, अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को लोकसभा स्तर पर एक और बड़े और करारे झटके का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा 'ऑपरेशन टाइगर' अब पूरी तरह जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है, जिसके तहत उद्धव गुट के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना का दामन थामने का मन बना लिया है।
लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग गुट बनाने की तैयारी
ताजा अपडेट के अनुसार, उद्धव ठाकरे खेमे से नाराज चल रहे छह बागी सांसद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। ये सांसद आज ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें एक आधिकारिक पत्र सौंप सकते हैं, जिसमें वे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट से अलग होने और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अपना समर्थन देने की औपचारिक घोषणा करेंगे। चूंकि कुल 9 में से 6 सांसद (यानी दो-तिहाई संख्या) पाला बदल रहे हैं, इसलिए वे दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत होने वाली किसी भी कानूनी अयोग्यता से सुरक्षित बच जाएंगे। कूटनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा आम है कि पाला बदलने वाले इस बागी समूह के किसी एक सांसद को केंद्र की एनडीए सरकार में मंत्री पद भी दिया जा सकता है।
शिवसेना (यूबीटी) की तरफ से जवाबी कानूनी घेराबंदी
पार्टी में इस बड़ी टूट की आहट को भांपते हुए शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक कड़ा पत्र लिखकर अग्रिम मांग की है कि शिवसेना (उबाठा) से अलग होने का दावा करने वाले किसी भी कथित बागी गुट को संसद में स्वतंत्र मान्यता, अलग दर्जा या कोई भी संसदीय विशेषाधिकार न दिया जाए। सावंत ने जोर देकर कहा कि लोकसभा अध्यक्ष कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले मूल पार्टी का पक्ष जरूर सुनें। इस बीच, राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बागियों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कल रात एक चार्टर्ड प्लेन नांदेड़ एयरपोर्ट पर उतरा और दो सांसदों को लेकर उड़ गया। राउत ने तंज कसा कि जिनके पास कभी ऑटो-रिक्शा से चलने के पैसे नहीं थे, वे आज ठाकरे ब्रांड की बदौलत चार्टर्ड प्लेन में उड़ रहे हैं।
ऑपरेशन टाइगर नहीं, यह 'ऑपरेशन गीदड़' है: नाना पटोले
महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर बेहद तल्ख और तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की सरेआम हत्या करार देते हुए कहा, "यह 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं, बल्कि 'ऑपरेशन गीदड़' है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगी दल सत्ता की भूख में सारी लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार कर रहे हैं।" पटोले ने आगे कहा कि केंद्रीय सत्ता के नशे में चूर लोग विपक्षी दलों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को लालच और दबाव के दम पर अपने पाले में खींचकर खोखला शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। अरविंद सावंत के पत्र पर बात करते हुए उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष की स्वायत्तता पर भी सवाल उठाए और कहा कि अब स्पीकर वही फैसले लेते हैं जो उन्हें शीर्ष स्तर से कहे जाते हैं।
भाजपा ने झाड़ा पल्ला और शिंदे गुट ने किया बड़ा दावा
इस पूरे सियासी बवंडर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूरी तरह से रक्षात्मक रुख अपनाते हुए खुद को इस मामले से अलग कर लिया है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि उद्धव ठाकरे के सांसद या विधायक कहां जा रहे हैं, इससे भाजपा का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे को खुद आत्ममंथन करना चाहिए कि उनके साथी लगातार उनका साथ क्यों छोड़ रहे हैं; इसमें भाजपा को बेवजह घसीटना गलत है। दूसरी तरफ, शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने उद्धव सेना पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) अब पूरी तरह से अप्रासंगिक हो चुकी है और उसके नेताओं का मनोबल टूट गया है। उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि साल 2029 तक उद्धव ठाकरे की पार्टी का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
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