खजुराहो की शांति और संस्कृति पर मंडराया खतरा
सरदार पटेल जयंती पर विशेष बैठक में उठी खजुराहो को बचाने की गूंज
छतरपुर। महाराजा छात्रशाल स्मृति शोध संस्थान के तत्वावधान में बीते रोज छतरपुर स्थित बुंदेलखंड मोटर ट्रांसपोर्ट कम्पनी परिसर में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का नेतृत्व मतंगेश्वर सेवा समिति एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर, खजुराहो के पंडित सुधीर शर्मा ने किया। बैठक की शुरुआत आधुनिक भारत के शिल्पकार और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में उनके चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन समर्पित करने से हुई। उपस्थित जनों ने राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रतीक सरदार पटेल के योगदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया।
श्रद्धांजलि के उपरांत सभा का मुख्य विषय खजुराहो में प्रस्तावित मिलिट्री बेस की स्थापना रहा। इस विषय पर उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने गहरी चिंता व्यक्त की। पंडित शर्मा ने कहा कि यदि खजुराहो में सैन्य अड्डे की स्थापना होती है, तो इस क्षेत्र का शांति और सौंदर्य से भरा वातावरण पूरी तरह बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि वायुसेना के विमानों की निरंतर आवाजाही और उनके शोर से खजुराहो के विश्वप्रसिद्ध मंदिरों की पवित्रता, आध्यात्मिकता और आकर्षण प्रभावित होंगे। इससे यहाँ का अंतरराष्ट्रीय पर्यटन, स्थानीय व्यापार और पारिस्थितिक संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित होगा खजुराहो के मंदिर केवल पर्यटन की दृष्टि से नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत के जीवित प्रतीक हैं, जिन्हें यूनेस्को ने विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दी है। ऐसे स्थान पर मिलिट्री बेस की स्थापना न केवल सांस्कृतिक असंतुलन पैदा करेगी बल्कि क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पहचान पर भी गहरा असर डालेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यहाँ का वन्य जीवन, प्राकृतिक वातावरण और अध्यात्म की शांति इस कदम से खतरे में पड़ सकती है।
बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने एकमत होकर इस प्रस्ताव का विरोध किया और निर्णय लिया कि इस मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा। सभी ने सहमति से कहा कि एक प्रतिनिधि मंडल जल्द ही रक्षा मंत्री से भेंट करेगा और उन्हें इस समस्या से अवगत कराते हुए आग्रह करेगा कि इस बेस के लिए किसी वैकल्पिक स्थान का चयन किया जाए, जिससे खजुराहो की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके। इस विशेष बैठक में बुंदेलखंड मोटर ट्रांसपोर्ट कम्पनी के हर्ष अग्रवाल, पेप्टेक ग्रुप के विनय चौरसिया, महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान के अध्यक्ष राकेश शुक्ला राधे, प्रदीप जैन, सम्यक जैन, ओशो आश्रम खजुराहो के संदीप सोनी तथा परिवर्तन एनजीओ एवं बुंदेलखंड विकास निधि बैंक के प्रतिनिधि सहित अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। बैठक का समापन खजुराहो की रक्षा और संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ। सभी ने यह दृढ़ निश्चय व्यक्त किया कि खजुराहो की शांति, संस्कृति और पर्यावरण की पवित्रता को बचाने के लिए जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, जिससे प्रत्येक नागरिक इस आंदोलन का हिस्सा बने और आने वाली पीढिय़ाँ भी इस पवित्र भूमि की आध्यात्मिक विरासत पर गर्व कर सकें।
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