शिक्षक की फेसबुक पोस्ट बनी मुसीबत; डीईओ ने अतिथि शिक्षक और प्राचार्य को थमाया नोटिस
छतरपुर। मध्य प्रदेश शासन द्वारा शिक्षकों के लिए लागू की गई अनिवार्य ई-अटेंडेंस व्यवस्था के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट डालना छतरपुर जिले के एक अतिथि शिक्षक और स्कूल के प्राचार्य को भारी पड़ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी छतरपुर ने इसे शासन की नीतियों के खिलाफ गंभीर कदाचरण और आचार संहिता का खुला उल्लंघन माना है।
डीईओ ने शासकीय हाईस्कूल भवानीपुर लवकुशनगर में पदस्थ अतिथि शिक्षक वर्ग-2 रामअवतार कुशवाहा और स्कूल के प्राचार्य लक्ष्मीदीन प्रजापति दोनों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर 15 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का कड़ा निर्देश दिया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अतिथि शिक्षक को ब्लैकलिस्ट करने और प्राचार्य के खिलाफ दंडात्मक अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
फेसबुक पोस्ट में लिखा था- शिक्षक का बीपी बढ़ रहा है
शासकीय पत्रों के अनुसार, अतिथि शिक्षक रामअवतार कुशवाहा ने 13 जुलाई 2026 को फेसबुक पर एक शिक्षक की ई-अटेंडेंस लगाते हुए तस्वीर अपलोड की थी। पोस्ट में उन्होंने लिखा था आज मैंने अपने विद्यालय में अपनी आँखों के सामने एक अत्यंत चिंताजनक दृश्य देखा। एक शिक्षक सुबह 10 से 10:55 बजे तक केवल ई-अटेंडेंस दर्ज कराने के लिए तकनीकी समस्याओं से जूझता रहा। समय पर उपस्थिति दर्ज न होने का डर और वेतन कटने की आशंका शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बना रही है। यह स्थिति शिक्षकों का बीपी बढ़ाने वाली है।
विभाग ने कहा— ऐप में कोई तकनीकी खराबी नहीं, फैलाई जा रही भ्रामक जानकारी
जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा लागू हमारे शिक्षक ऐप में किसी भी प्रकार की कोई तकनीकी समस्या नहीं है। जिले और प्रदेश के हजारों लोकसेवक प्रतिदिन बिना किसी रुकावट के इसके माध्यम से हाजिरी लगा रहे हैं। ऐसे में अतिथि शिक्षक द्वारा किया गया कृत्य ई-अटेंडेंस प्रणाली की निराधार आलोचना, शिक्षकों में भय का माहौल बनाने और विभाग की छवि धूमिल करने की कुचेष्टा है। इसके साथ ही यह सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर मनमाने तरीके से टिप्पणी करने के संबंध में लागू की गई आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है।
प्राचार्य पर गिरी गाज: अधीनस्थों पर नियंत्रण नहीं
डीईओ ने हाईस्कूल भवानीपुर के प्राचार्य लक्ष्मीदीन प्रजापति को भी लपेटे में लिया है। नोटिस में कहा गया है कि स्कूल के भीतर की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाना यह दर्शाता है कि प्राचार्य का अपने अधीनस्थों पर कोई नियंत्रण नहीं है। वे अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में सजग नहीं हैं और उन्होंने कर्मचारियों को विधिवत कार्यों में संलग्न नहीं किया है, जिससे कर्मचारी मौलिक कार्य छोड़कर कार्यालयीन समय में स्वैच्छाचारिता कर रहे हैं।
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