नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया गया बाल विवाह रोकने का संदेश
बक्सवाहा। सर्व आत्माओं के कल्याणकारी शिव पिता रहमदिल है। दया, करुणा के सागर परमात्मा के साथ स्वयं को स्पष्ट रखना चाहिए। छल कपट की मानसिकता से आत्मा कमजोर हो जाती है। जिससे मन ही मन सूक्ष्म रूप से दुखों का बोझ जीवन को भारी कर देता है। उक्त उदगार ब्रह्माकुमारी रमा दीदी ने महाशिवरात्रि के पवन पर्व पर नगर बक्सवाहा में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि मन की स्थिरता को कायम रखने के लिए आत्मा रूपी दीपक में ज्ञान और योग का घृत डालना जरूरी है। उच्च कोटि की शुद्ध संकल्पों से ही मन के कोनों में छिपे अज्ञान अंधकार से मुक्ति पाना संभव है एवं इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य रूप से महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत बाल विवाह विषय पर नुक्कड़ नटक प्रस्तुत किया गया। ब्रह्माकुमारीज़ राजयोगा एजुकेशन रिसर्च फाऊंडेशन के समाज सेवा प्रभाग द्वारा ब्रह्माकुमारी रमा दीदी ने नुक्कड़ नटक प्रस्तुत करने वाली सभी कुमारियों का सम्मान किया और सभा में उपस्थित सभी लोगों से अनुरोध किया कि यह जागरूकता जन-जन की जीवन में और घरों में होनी चाहिए एवं ब्रह्माकुमारीज़ का समाज सेवा प्रभाव जन जागरूकता कार्य में सदा सहयोगी रहता है। इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित समाजसेवी कामता माली, समाजसेवी महेंद्र कुमार जैन, समाजसेवी गोविंद प्रसाद गुप्ता, समाजसेवी संजय कुङेरिया जी आदि लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये। अंत में सभी ने प्रसाद एवं ईश्वरीय साहित्य प्राप्त किया।
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