विकसित भारत के लिए सशक्त आर्थिक मॉडल तैयार करना जरूरी - प्रो. हरीश अग्रवाल, ग्वालियर
छतरपुर। महाराज छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर के तत्वावधान में कुलगुरु प्रो. राकेश सिंह के मुख्य संरक्षण, रजिस्ट्रार यशवंत सिंह पटेल तथा वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो.बी.के.अग्रवाल के संरक्षण में दो दिन से संचालित राष्ट्रीय सेमिनार का विश्वविद्यालय के नेवी हाल में गरिमापूर्ण समारोह में समापन संपन्न हुआ।यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी विकसित भारत विजन 2047 में उद्यमिता की भूमिका विषय पर पीएम ऊषा द्वारा पोषित तथा सेडमैप द्वारा आयोजित थी।
कार्यक्रम के आरंभ में बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा अंशिका अनुरागी द्वारा सरस्वती वंदना व अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम के संयोजक प्रो.ओपी अरजरिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए भारत के विकास में उद्यमिता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।दूसरे दिन इस सत्र में 35 शोधार्थियों द्वारा ऑफलाइन व ऑनलाइन शोध पत्रों की उम्दा प्रस्तुति दी गई, जिसमें शोधार्थियों द्वारा भारत में महिला एवं कृषि उद्यमिता के योगदान, ग्रामीण उद्यमिता की भूमिका, सूक्ष्म मध्यम एवं लघु उद्योगों की भूमिका, संस्थागत वित्त का सूक्ष्म मध्य एवं लघु उद्योगों के विकास में योगदान, डिजिटल उद्यमिता, उद्यमिता विकास में ए.आई की भूमिका व खतरे, रामचरितमानस में प्रबंधकीय सिद्धांतों की विवेचना,विकसित भारत में स्टार्टअप योजना का योगदान,मेक इन इंडिया आदि विषयों पर प्रकाश डाला गया।
इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सागर के प्राचार्य प्रो. आनंद तिवारी ने विश्व गुरु की संकल्पना,भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन, विदेशी निवेश आदि को विवेचित किया। उन्होंने कहा कि जिस गति से भारत सभी क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है उससे भारत 2047 तक अमेरिका से भी आगे निकल जाएगा। शासकीय एमएलबी कॉलेज,ग्वालियर के प्राचार्य प्रो हरीश अग्रवाल ने अपना सार्थक उद्बोधन देते हुए कहा कि विकसित भारत के लिए एक सशक्त आर्थिक मॉडल तैयार करना जरूरी है जिससे 2047 में विकसित भारत के विजन को मूर्त रूप दिया जा सके।आपने शोध छात्रों को अच्छे पेपर प्रजेंटेशन के टिप्स भी दिए।
इस अवसर पर वाणिज्य के फार्मर प्रो. एस.पी जैन ने कहा कि नया सोचने की हिम्मत और सपनों को हकीकत में बदलना ही उद्यमिता है।उद्यमिता विकास से ही विकसित भारत 2047 का सपना साकार होगा। प्रो. बी.के. अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत 2047 के सपनों की साकारता के लिए हमें भारतीय संस्कृति,धर्म और ज्ञान परंपरा को ध्यान में रखकर भारतीयता के आधार पर विकास लक्ष्य को प्राप्त करना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. डी.पी शुक्ला ने कहा कि उद्यमिता से आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन ही नहीं होता बल्कि देश की आर्थिक समस्याओं का समाधान तथा सामाजिक विकास होता है।आयोजन सचिव प्रो. अशोक निगम ने सेमिनार का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन रूपाली पंसारी, गौसिया बानो तथा शुभी जैन ने किया आभार प्रदर्शन शोधार्थी दीपक आठया ने किया। इस अवसर पर वाणिज्य के सभी प्राध्यापक, अतिथि विद्वान, विषय विशेषज्ञ, शोधार्थी तथा काफी मात्रा में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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