एमसीबीयू की कुलपति के प्रोटोकॉल परिपत्र पर उठे सवाल
छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर की कुलपति डॉ. शुभा तिवारी द्वारा जारी किए गए प्रोटोकॉल परिपत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि उनसे छात्र-छात्राएं, मीडिया प्रतिनिधि और विभागाध्यक्ष सीधे नहीं मिल सकेंगे। यह आदेश सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर तानाशाही के आरोप लग रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में 186 शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालय आते हैं, जिनमें लगभग दो लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के विभिन्न फैकल्टी में स्वयं के लगभग 15 हजार छात्र हैं, जो समय-समय पर परीक्षा, अंकसूची, परीक्षा परिणाम व अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लेकर कुलपति से मिलने आते हैं लेकिन नए प्रोटोकॉल के अनुसार अब कोई भी छात्र, शिक्षक या मीडिया प्रतिनिधि बिना अनुमति या पूर्व सूचना के कुलपति से सीधे संपर्क नहीं कर सकेगा। गौरतलब है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्राध्यापक छात्रों से सीधा संवाद करें और उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण करें। लेकिन छतरपुर विश्वविद्यालय का यह ताजा आदेश मुख्यमंत्री की मंशा के ठीक विपरीत नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय में छात्र हितों, पारदर्शिता और संवाद की आवश्यकता पहले से ही बनी हुई है, वहीं इस प्रकार के परिपत्र को छात्रों, शिक्षकों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने तानाशाही आदेश करार दिया है। आरोप यह भी हैं कि इस तरह के आदेशों के पीछे विश्वविद्यालय में हो रहे कथित भ्रष्टाचार, अनावश्यक व्यय और अन्य अव्यवस्थाओं को दबाने की मंशा है, जिससे छात्रों की आवाज दबाई जा सके। अब देखना होगा कि इस आदेश को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच क्या प्रतिक्रिया होती है और शासन-प्रशासन इस दिशा में क्या रुख अपनाता है।
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