सभी प्रारुपों में खेलना चाहते हैं रिंकू
आक्रामक बल्लेबाज रिंकू सिंह ने अपनी बल्लेबाजी से टी20 क्रिकेट में अपनी अलग ही पहचान बनायी है। वह जिस प्रकार लंबे-लंबे छक्के लगाकर रन बनाते हैं उससे वह लोगों के पसंदीदा बल्लेबाज बन गये हैं और उन्हें टी20 विशेषज्ञ माना जाने लगा है। वहीं रिंकू ने कहा कि वह केवल टी20 के विशेषज्ञ बल्लेबाज नहीं बने रहना चाहते। उनका सपना भारतीय टीम की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेलना है। रिंकू निचले क्रम पर तेजी से रन बनाने के लिए जाने जाते हैं। यही खूबी उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है। अब तक 33 टी20 आई में रिंकू ने 42 की औसत और 160 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से 546 रन बनाए हैं। वहीं घरेलू क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है।
रिंकू ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अभी तक 50 मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 54.68 की औसत के साथ 3336 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके नाम 22 अर्धशतक और 7 शतक हैं। रिंकू से पूछा गया कि अकसर आपको टी20 स्पेशलिस्ट का टैग दिया जाता तो उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि जब मैं छक्के लगाता हूं तो प्रशंसकों को बहुत अच्छा लगता है, और मैं इसके लिए सचमुच आभारी हूं पर मेरा रणजी ट्रॉफी औसत भी बहुत अच्छा है, वहां मेरा औसत 55 से ज्यादा है। मुझे लाल गेंद से क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है। मैंने भारत के लिए दो एकदिवसीय मैच भी खेले हैं और उनमें से एक में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसलिए, ऐसा नहीं है कि मैं सिर्फ टी20 खिलाड़ी हूं। मेरा मानना है कि अगर मुझे मौका मिले तो मैं हर प्रारूप में अच्छा प्रदर्शन कर सकता हूं।
उन्होंने आगे कहा, मुझे एक ही प्रारुप तक में सीमित रहना पसंद नहीं; मैं खुद को सभी फॉर्मेट का खिलाड़ी मानता हूं। मेरा सपना भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना है, और अगर मुझे मौका मिला, तो मैं उसे लेने के लिए तैयार रहूंगा। वह सुरेश रैना अपना आदर्श मानते हैं। ”
एमपी में इंजीनियरिंग एडमिशन नियमों में ढील, छात्रों को मिलेगी नई सुविधा
फैंस हुए खुश, ट्रैवल रोमांस कैटेगरी में ‘DDLJ’ की धाक
दिल्ली CM पर हमले के मामले में अपील सुनवाई, हाईकोर्ट ने दिए अहम संकेत
उज्जैन में सारा अर्जुन, ‘धुरंधर 2’ की कामयाबी के बाद महाकाल के दरबार में हाजिरी
विकास की कीमत या मजबूरी? खुद टूट रही हैं दुकानें, व्यापारी लाचार
SIR अभियान का असर, 4.96 लाख मतदाता सूची से बाहर
सेना में बड़ी पदोन्नति: कर्नल Shrikant Purohit को मिलेगा ब्रिगेडियर रैंक
संयम और संवेदनशीलता की मिसाल: नमाज के समय भारतीय सेना ने नहीं किया हमला