विधानसभा में सरकार के जवाब से बढ़ा विवाद
भोपाल|पिछले तीन साल में मध्यप्रदेश में आयोजित संभागीय इंडस्ट्रियल मीट और भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट पर सरकारी खजाने से कुल 201 करोड़ 85 लाख 31 हजार रुपये खर्च किए गए, लेकिन इन आयोजनों से न तो कोई एमओयू हुआ, न निवेश आया और न ही रोजगार सृजन का कोई अनुबंध हुआ. यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के सवाल के लिखित जवाब में दी|
विधायक डॉ. भूरिया ने मांगा था ब्यौरा
विधायक डॉ. भूरिया ने वर्ष 2020 से 2025 के बीच संभाग स्तर पर आयोजित इंडस्ट्रियल समिट में किए गए एमओयू, संबंधित संस्थाओं और प्रस्तावित निवेश की जानकारी मांगी थी. साथ ही भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में किन कंपनियों से समझौते हुए, कितनी राशि के निवेश का अनुबंध हुआ और कितने लोगों को रोजगार देने का एमओयू किया गया. इसका भी ब्यौरा चाहा था|
तीन वर्षों में कुल व्यय 201 करोड़ 85 लाख तक पहुंचा
मुख्यमंत्री के जवाब के अनुसार, वर्ष 2023 में 1565 लाख 22 हजार रुपये, वर्ष 2024 में 7753 लाख रुपये और वर्ष 2025 में प्रावधिक रूप से 10867 लाख 9 हजार रुपये खर्च किए गए. इस तरह तीन वर्षों में कुल व्यय 201 करोड़ 85 लाख 31 हजार रुपये तक पहुंच गया. हालांकि इस अवधि में उद्योग स्थापना के लिए किसी भी प्रकार का एमओयू नहीं किया गया. जब निवेश और उद्योग स्थापना के समझौते ही नहीं हुए, तो रोजगार सृजन को लेकर भी कोई औपचारिक अनुबंध नहीं हुआ|
विपक्ष ने इन आयोजनों की उपयोगिता पर उठाए सवाल
सरकारी जवाब के बाद विपक्ष ने इन आयोजनों की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि भारी-भरकम खर्च के बावजूद यदि ठोस निवेश या रोजगार का परिणाम सामने नहीं आया, तो यह जनता के धन का दुरुपयोग है|
उद्योग विशेषज्ञों का अलग तर्क
वहीं उद्योग विशेषज्ञों का अलग तर्क है. उनका कहना है कि इन्वेस्टर्स मीट और इंडस्ट्रियल समिट के परिणाम तत्काल नहीं दिखते. पहले उद्योगपति निवेश की मंशा जाहिर करते हैं, फिर परियोजना का खाका तैयार होता है. इसके बाद भूमि, नियम-शर्तें, प्रोत्साहन पैकेज और अन्य प्रक्रियाओं पर लंबी बातचीत होती है. कई बार यह प्रक्रिया वर्षों तक चलती है, तब जाकर निवेश धरातल पर उतरता है|
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