क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? हरिद्वार के ज्योतिषी ने बताया आंखें खोल देने वाला सच
हिंदू धर्म में साल भर धार्मिक पर्व होते रहते हैं. उन्हें विधि विधान से पूर्ण करने पर चमत्कारी लाभ होते हैं. हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि पर्व का खास महत्त्व है. महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा अर्चना, स्तोत्र आदि के पाठ का विधान है. इस दिन भोले का अभिषेक करने से चमत्कारी लाभ होते हैं. महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होता है. हरिद्वार के पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि महाशिवरात्रि का पर्व भोलेनाथ और माता पार्वती को समर्पित है. महाशिवरात्रि का सामान्य शब्दों में अर्थ महा शिव रात्रि है. भगवान शिव का पूजा-पाठ प्रदोष काल यानी रात्रि में किया जाता है. इस दिन भोलेनाथ के भक्त व्रत, पूजा और स्तोत्र आदि का पाठ करते हैं.
हजारों साल तपस्या
ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन ही भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था. माता पार्वती ने भोलेनाथ को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों साल तक कठिन तपस्या की थी. फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भोलेनाथ और पार्वती का विवाह हुआ था. इस पर्व के दिन भोलेनाथ और माता पार्वती के निमित्त व्रत पूजा पाठ करने का विशेष महत्त्व है
शिवलिंग से कनेक्शन
महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान भोले ने खुद को पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट किया था. भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो सके इसके लिए भोलेनाथ ने खुद को शिवलिंग के रूप में बदला था. महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर दूध, जल, शहद, तिल, जौ, बेलपत्र आदि से भोलेनाथ का अभिषेक करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.
इसलिए करते हैं जलाभिषेक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही भोलेनाथ ने संपूर्ण सृष्टि का कल्याण करने के लिए समुद्र मंथन से निकाला कालकुट विष अपने कंठ में धारण किया था. कहा जाता है कि जब भोलेनाथ ने इस विष को पिया था तो उनका तापमान अधिक बढ़ गया था, जिसके बाद सभी देवताओं ने उन पर जल डाला था. इससे भोलेनाथ अत्यधिक प्रसन्न हुए थे. महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल, दूध आदि अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं.
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