पात्र बुजुर्ग इंतजार में, अपात्र खाते रहे पेंशन का पैसा
शिमला। हिमाचल प्रदेश के तांगणू-जांगलिख पंचायत में वृद्धावस्था पेंशन के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने कानूनी शिकंजा कस दिया है। जिला कल्याण अधिकारी की औपचारिक शिकायत पर चिड़गांव थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, जिसके बाद से ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच के शुरुआती दौर में ही 44 लोगों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से पेंशन लेने की पुष्टि हुई है। इस प्रकरण ने सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इसमें केवल ग्रामीण ही नहीं बल्कि विभाग के भीतर बैठे कुछ सफेदपोशों की मिलीभगत की आशंका भी प्रबल हो गई है।
उम्र की सीमा लांघकर सरकारी धन का दुरुपयोग
इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू लाभार्थियों की आयु से जुड़ा है, जहाँ वृद्धावस्था पेंशन के लिए निर्धारित 60 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि महज 44 से 54 वर्ष की आयु के लोग भी पिछले कई वर्षों से बुजुर्गों के हक पर डाका डाल रहे थे। तांगणू और जांगलिख गांवों के इन अपात्र लोगों में पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं, जिनमें से कई तो साल 2018-19 से ही लगातार सरकारी धन का अनुचित लाभ उठा रहे हैं। विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आखिर इतने लंबे समय तक यह धोखाधड़ी सिस्टम की नजरों से कैसे ओझल रही।
पंचायत से लेकर तहसील दफ्तर तक संदिग्ध भूमिका
फर्जीवाड़े की इस पूरी पटकथा में पंचायत सचिव और तहसील स्तर के अधिकारियों की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। विभागीय पड़ताल में यह बात सामने आई है कि पंचायत स्तर पर परिवार रजिस्टर की नकल तैयार करने और आयु के सत्यापन के दौरान जानबूझकर हेराफेरी की गई। सबसे बड़ा प्रशासनिक पेच यह है कि जब ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड्स में उम्र का स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा था, तब भी इन आवेदनों को तहसील कल्याण कार्यालय द्वारा मंजूरी कैसे दे दी गई। अधिकारियों का मानना है कि बिना किसी आंतरिक मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर दस्तावेजों में बदलाव करना संभव नहीं था, इसलिए अब साक्ष्यों के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नामजद कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
प्रदेशव्यापी सत्यापन और सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश
शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि जनहित की योजनाओं में भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इस घोटाले की गूंज शासन के उच्च स्तर तक पहुँच गई है, जिसके बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव ने प्रदेश के सभी जिलों में चल रही पेंशन योजनाओं के पुन: सत्यापन के आदेश जारी कर दिए हैं। वर्तमान में पुलिस और विभाग संयुक्त रूप से दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रहे हैं ताकि इस भ्रष्टाचार के मूल स्रोत तक पहुँचा जा सके। इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल दोषियों को सजा दिलाना है, बल्कि भविष्य में सरकारी धन के इस तरह के दुरुपयोग को रोकना भी है।
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