संविधान हत्या दिवस के रूप में याद किया गया आपातकाल, बीजेपी ने किए विशेष आयोजन
नई दिल्ली: देश में लगाए गए आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) गुरुवार को 'संविधान हत्या दिवस' मना रही है। इस मौके पर पार्टी की ओर से बिहार, हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बीजेपी का कहना है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिकों की आजादी को बहुत गहरा नुकसान पहुंचाया था। इस दिन को मनाने का असल मकसद लोगों को आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं और उसके असर से रूबरू कराना है।
बिहार में बड़े पैमाने पर आयोजन और सम्मान समारोह
बिहार में इस दिन को बेहद बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है, जहाँ राज्य के करीब 90,000 बूथों पर अलग-अलग कार्यक्रम रखे गए हैं। राजधानी पटना में आयोजित एक मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी शामिल हुए, जहाँ उन्होंने आपातकाल विरोधी आंदोलन का हिस्सा रहे करीब 450 जेपी सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे और सिर्फ राजनीतिक सत्ता में बने रहने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया गया था। इस अभियान के तहत 30 जून से 6 जुलाई तक बिहार के सभी 52 संगठनात्मक जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन और छात्र सम्मेलन भी कराए जाएंगे।
हरियाणा में आपातकाल को बताया लोकतंत्र का 'अंधकारमय दौर'
हरियाणा में भी बीजेपी नेताओं ने आपातकाल की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दौर बताया। उन्होंने कहा कि उस समय न सिर्फ लोगों के अधिकार कुचले गए, बल्कि मीडिया पर भी कड़ी पाबंदी (सेंसिरशिप) लगा दी गई थी। इस दौरान हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी गलती के जेलों में डाल दिया गया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और तत्कालीन भारतीय जनसंघ ने उस समय इस तानाशाही का कड़ा विरोध किया था और लोकतंत्र को वापस लाने के लिए देशव्यापी आंदोलन चलाया था।
नई पीढ़ी को जागरूक करने की कोशिश
बीजेपी नेताओं का कहना है कि 'संविधान हत्या दिवस' मनाने का मुख्य उद्देश्य उन संघर्ष करने वाले वीर लोगों को सम्मान देना है जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए लाठियां और जेलें झेलीं। इसके साथ ही आज की नई पीढ़ी को भी आपातकाल के इतिहास और उसके गंभीर परिणामों के बारे में जागरूक करना है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए। इसी सिलसिले में गुरुवार शाम को पंचकुला स्थित अटल सभागार में एक विशेष कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
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