वित्त मंत्री: मुद्रा योजना से छोटे उद्यमियों को मिला आर्थिक सहारा
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से कई छोटे उद्यमियों को फायदा हुआ है और इस योजना के शुरू होने के बाद से 39.48 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 8 अप्रैल, 2015 को शुरू की गई मुद्रा योजना के तहत कुल निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) कुल ऋणों का लगभग 2 प्रतिशत हैं।
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के उत्तर देते हुए, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एक बहुत ही लोकप्रिय योजना है और इससे कई छोटे उद्यमियों को लाभ हुआ है। ...योजना शुरू होने के बाद से 39.48 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसलिए यह सबसे बड़ी बैंक ऋण योजनाओं में से एक है, जो उन लोगों तक पहुंची है जिनके पास गिरवी रखने के लिए कुछ भी नहीं है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तीन घटक हैं- शिशु, किशोर और तरुण। 31 मार्च, 2025 तक, शिशु श्रेणी में कुल ऋण राशि का 12.4 प्रतिशत बकाया है। किशोर श्रेणी में 9.48 प्रतिशत और तरुण श्रेणी में कुल दी गई राशि का 7.92 प्रतिशत बकाया है।
उन्होंने कहा कि बैंक इन बकाया ऋणों की वसूली के लिए प्रयासरत हैं। वित्त मंत्री सीतारमण ने प्रश्नकाल के दौरान ही एक अन्य पूरक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में आर्थिक सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) मानदंडों का पालन नहीं करने के लिए विभिन्न कंपनियों पर कुल मिलाकर लगभग 20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी कानून के तहत, लाभ कमाने वाली कुछ कंपनियों के लिए एक वित्तीय वर्ष में अपने तीन साल के औसत वार्षिक लाभ का कम से कम 2 प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सीएसआर खर्च से संबंधित हर निर्णय संबंधित कंपनी के बोर्ड द्वारा लिया जाता है। कंपनी और उसका बोर्ड यह तय करते हैं कि कितना खर्च करना है और कहां खर्च करना है। इसमें हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते। इस पर हस्तक्षेप करते हुए, राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने पूछा कि क्या मानदंडों में बदलाव किया जा सकता है ताकि पिछड़े राज्यों को सीएसआर निधि का लाभ मिल सके। सभापति के रूप में, आपने यह कहा है। मैं इसे एक सुझाव के रूप में लेती हूं और इस पर गौर करूंगी।
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